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UPI के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज को दिवाली तक टाला, NPCI ने लिया फैसला

National Payments Corporation of India (NPCI) ने चुनिंदा हाई-वैल्यू Unified Payments Interface (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की योजना को दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया है। इस फैसले से भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को त्योहारी सीजन के दौरान राहत मिली है।

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त्योहारी खरीदारी के समय ट्रांजैक्शन की संख्या काफी बढ़ जाती है, इसलिए यह कदम उठाया गया है। NPCI के दस्तावेजों के मुताबिक, साल 2020 की शुरुआत से UPI भारत का सबसे प्रमुख रीयल-टाइम पेमेंट सिस्टम रहा है। इसमें बैंक अकाउंट से किए जाने वाले भुगतानों पर अब तक कोई शुल्क नहीं लगाया गया था।

NPCI ने सितंबर 2026 में एक नया ढांचा तैयार किया था। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यक्ति-से-मर्चेंट (person-to-merchant) ट्रांजैक्शन पर 0.4% की दर से शुल्क लगाने का प्रस्ताव था। इस प्रस्तावित शुल्क की अधिकतम सीमा एक ट्रांजैक्शन पर 300 रुपये तय की गई थी।

विभिन्न सेवाओं के लिए शुल्क और नियम

प्रस्तावित योजना में कुछ खास श्रेणियों के लिए अलग नियम बनाए गए थे। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल (ईंधन) जैसे क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज तय किया गया था।

NPCI के आधिकारिक बयानों के अनुसार, कुछ ट्रांजैक्शन को इस योजना से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • व्यक्ति-से-व्यक्ति (person-to-person) ट्रांसफर।
  • 2,000 रुपये तक के सभी भुगतान।
  • पात्र छोटे मर्चेंट (small merchants)।

नियमों के मुताबिक, मर्चेंट इन शुल्कों का बोझ सीधे ग्राहकों पर नहीं डाल सकते हैं। यह नियम आम उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त खर्च से बचाने के लिए बनाया गया है।

दिवाली तक टली समयसीमा और कानूनी स्थिति

NPCI स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर 2026 को इस देरी की घोषणा की। कमेटी ने कहा कि नई कार्यान्वयन तिथि की जानकारी अलग से दी जाएगी। NPCI ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

All India Mobile Retailers Association और All India Consumer Products Distributors Federation के प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से इस देरी की मांग की थी। उनका कहना था कि हाई-वॉल्यूम सेल के दौरान लागत नहीं बढ़नी चाहिए। मूल रूप से यह नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना था, लेकिन अब इसे 8 नवंबर 2026 को आने वाली दिवाली तक के लिए हटा दिया गया है।

इस बीच, वकील Anjan Datta ने एक रिट याचिका दायर की है। उन्होंने पारदर्शिता और संवैधानिक वैधता के आधार पर इस पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने इस शुल्क के कानूनी आधार पर NPCI, Reserve Bank of India और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। इस मामले की सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होनी है, हालांकि कोर्ट ने फिलहाल इस ढांचे पर कोई रोक नहीं लगाई है।

मार्केट और स्टेकहोल्डर्स पर प्रभाव

इस खबर के बाद 13 अक्टूबर 2026 को फिनटेक शेयरों में रिकवरी देखी गई। ट्रांजैक्शन लागत को लेकर बाजार में जो अनिश्चितता थी, वह इस फैसले से कम हो गई। इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी और कपड़ों जैसे हाई-वैल्यू सामान बेचने वाले बड़े रिटेलर्स को साल के सबसे व्यस्त हफ्तों में इन खर्चों से राहत मिलेगी।

पेमेंट इकोसिस्टम के लिए राजस्व आने की समयसीमा अब आगे बढ़ गई है। इसका असर साइबर सुरक्षा, फ्रॉड प्रिवेंशन और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए होने वाले निवेश पर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्व का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा जारी करने वाले बैंकों (issuing banks) को दिया जाना था।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ढांचा कुल मर्चेंट वॉल्यूम के केवल 4 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करता है। फिर भी, यह बदलाव उस पूरी तरह मुफ्त मॉडल से अलग है जिसने UPI को लोकप्रिय बनाया था। Nithin Kamath जैसे जानकारों ने पहले ही कहा था कि जिस सिस्टम को लोग सालों तक मुफ्त पब्लिक यूटिलिटी की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, उसमें शुल्क लगाने से संवेदनशीलता बढ़ती है।

छोटे मर्चेंट की सीमा में बदलाव या कैटेगरी की अंतिम सूची जैसे विवरण नई तारीख के नोटिफिकेशन के बाद आएंगे। स्टेकहोल्डर्स को दिवाली के बाद आधिकारिक सर्कुलर देखने की सलाह दी गई है। 2 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से यह साफ होगा कि ये शुल्क योजना के अनुसार लागू होंगे या इनमें कोई बदलाव किया जाएगा।

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