समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में लाखों की संख्या में फर्जी एंट्री की गई हैं।
लखनऊ में 12 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने ये दावे किए। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पूरी प्रक्रिया समय और जनता के पैसे की बर्बादी साबित हुई है।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने ऐसे कई उदाहरण खोजे हैं, जहाँ एक ही व्यक्ति के नाम पर 10 वोटर रजिस्ट्रेशन किए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि वह सत्ताधारी पार्टी द्वारा किए जा रहे इस 403 सीटों के फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं करेंगे और जल्द ही इन गड़बड़ियों की विस्तृत सूची जारी करेंगे।
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और गंभीर आरोप
इस विवाद के बीच 11 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूँका और आयोग पर लोकतंत्र की हत्या और वोट चोरी का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर खुले तौर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर आयोग व्यवस्थित हेरफेर की शिकायतों पर कार्रवाई करने में विफल रहता है, तो उसे अपने मुख्यालय पर भाजपा का झंडा लगा लेना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से फॉर्म 7 के जरिए PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समुदायों के मतदाताओं को हटाने का मुद्दा उठाया। यादव ने संकेत दिया कि अगर इस मामले का समाधान नहीं हुआ, तो उनकी पार्टी इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने के लिए तैयार है।
वोटर लिस्ट प्रबंधन के नए नियम और सत्यापन प्रक्रिया
यह पूरा विवाद चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट मैनेजमेंट में किए गए हालिया बदलावों के बाद शुरू हुआ है। 10 अक्टूबर 2026 को फॉर्म 7 के लिए नए नियम लागू किए गए, जिसके तहत अब एक व्यक्ति पुनरीक्षण के दौरान अधिकतम 10 आवेदन और सामान्य परिस्थितियों में प्रति माह केवल 5 आवेदन ही दे सकता है।
इन नए नियमों के तहत अब मूल हस्ताक्षरों और पहचान के अधिक सख्त सत्यापन की अनिवार्यता कर दी गई है। आयोग ने इन बदलावों के जरिए वोटर लिस्ट की शुद्धता सुनिश्चित करने का दावा किया है।
बूथ स्तर अधिकारियों द्वारा घर-घर सत्यापन
चुनाव आयोग ने इससे पहले 7 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी। आयोग ने बताया कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया के बाद बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन का अभियान चलाया जाएगा।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन पात्र मतदाताओं को पंजीकृत करना है, जो किसी कारणवश लिस्ट में छूट गए होंगे। आयोग का मानना है कि इस प्रक्रिया से वोटर लिस्ट अधिक सटीक बनेगी।
इन तमाम सरकारी उपायों के बावजूद अखिलेश यादव का यह मानना है कि राज्य की मशीनरी और चुनाव आयोग मिलकर भाजपा के साथ काम कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह सब आगामी चुनावों से पहले चुनावी प्रक्रिया को बिगाड़ने की एक साजिश है।









