केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष Chirag Paswan ने 11 अक्टूबर 2026 को बिहार के पटना में राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शनों की स्थिति पर बात की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहाँ हमेशा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति दी गई है।
Paswan ने कहा कि इस तरह के आंदोलनों ने ऐतिहासिक रूप से देश को दिशा दिखाने का काम किया है। साथ ही उन्होंने माना कि ऐसे प्रदर्शनों से उभरते हुए युवा नेतृत्व को आगे आने के अवसर भी मिलते हैं।
हालांकि, Paswan ने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ असामाजिक तत्व इन मंचों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन तत्वों का मकसद देश में अव्यवस्था और माहौल खराब करना है।
अराजकता की कोशिश और सरकार की कार्रवाई
मंत्री ने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि उन लोगों की पहचान की जाए जो प्रदर्शन की आड़ में अपना निजी एजेंडा चलाते हैं। उनका उद्देश्य केवल देश में अराजकता और अफरा-तफरी पैदा करना होता है।
10 अक्टूबर 2026 की घटनाओं का जिक्र करते हुए Paswan ने केंद्र सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सरकार ने देशभर में अराजकता का माहौल बनाने की एक सोची-समझी कोशिश को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर लिया है। यह बयान दिल्ली और पटना में भारी सुरक्षा इंतजामों और व्यापक अशांति के बीच आया है।
दिल्ली में चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन
10 अक्टूबर को Cockroach Janata Party (CJP) ने दिल्ली में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar का इस्तीफा मांगना था।
CJP ने यह मांग चुनावी सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में कथित अनियमितताओं के कारण की थी। जंतर मंतर स्थल पर इस प्रदर्शन के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी।
अनुमति न होने के कारण दिल्ली पुलिस ने वहां भारी बैरिकेडिंग की और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। ऐसी खबरें भी आईं कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने बल का प्रयोग किया।
विपक्ष का आरोप और पटना में शिक्षकों का मार्च
विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने सरकार की इस कार्रवाई को ‘गुंडागर्दी’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे 12 अक्टूबर 2026 को फिर से प्रदर्शन करेंगे।
इसी बीच, 11 अक्टूबर 2026 को पटना में यूनिवर्सिटी और कॉलेज टीचर्स एंड नॉन-टीचिंग एम्प्लॉइज स्ट्रगल फ्रंट ने मार्च निकाला। यह विरोध प्रदर्शन बिहार यूनिवर्सिटी एक्ट 2026 के खिलाफ था।
इन स्थानीय प्रदर्शनों के जरिए 1976 के एक्ट को दोबारा लागू करने की मांग की जा रही है। पटना पुलिस ने इस मार्च के दौरान भी कई लोगों को हिरासत में लिया है।
इससे पहले बिहार में INDIA गठबंधन ने भी चुनावी और शासन संबंधी शिकायतों को लेकर इसी तरह के प्रदर्शन किए थे।









