राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव को 8 अक्टूबर, 2026 को पटना में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित ‘आक्रोश मार्च’ के दौरान हुई।
यह मार्च बिहार लोक भवन की ओर जा रहा था। प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी यादव ने पुलिस बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की और सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी धक्का-मुक्की हुई।
तेजस्वी यादव के साथ विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी और आरजेडी सांसद मीसा भारती को भी हिरासत में लिया गया। हालांकि, बाद में इन सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।
चुनाव आयोग और सरकार पर गंभीर आरोप
हिरासत में लिए जाने के बाद तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त को बचा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का इस्तेमाल विरोध की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब तेजस्वी यादव का सामना पुलिस से हुआ। इससे पहले 19 अगस्त, 2026 को भी उन्हें राज भवन मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था, जो सीवान में एके-47 फायरिंग के आरोपों से जुड़ा था।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और देशव्यापी विरोध
पूरे देश में यह unrest मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में हुई कथित अनियमितताओं के कारण फैला है। विपक्षी दलों का दावा है कि लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिसे वे ‘वोट चोरी’ कह रहे हैं।
इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने 8 अक्टूबर, 2026 को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली में 6 और 7 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शनों का नेतृत्व किया।
7 अक्टूबर को जब वे जंतर मंतर की ओर बढ़ रहे थे, तब सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद वे सड़क पर बैठ गए और प्रियंका गांधी को संविधान की एक प्रति हाथ में लिए सड़क पर लेटे हुए देखा गया।
संसद से चुनाव आयोग तक का संघर्ष
6 अक्टूबर को 100 से अधिक विपक्षी सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। इसके बाद आकाशवाणी परिसर में आठ घंटे का धरना चला।
इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को दो बार हिरासत में लिया गया। उन पर परिसर में जबरन घुसने की कोशिश के आरोप में एक FIR दर्ज की गई है। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को अवैध बताया है और कहा है कि उनके इस्तीफे तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
सुरक्षा इंतजाम और कानूनी स्थिति
दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और प्रदर्शनों के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। अब जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले नोटिस देना जरूरी है। इसके अलावा इंडिया गेट और राजपथ पर प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।
बढ़ते विरोध के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा को बढ़ाकर Z-प्लस कैटेगरी कर दिया गया है। कानूनी मोर्चे पर सुप्रीम कोर्ट ने CEC को निलंबित करने से इनकार कर दिया है, लेकिन उनकी नियुक्ति को वापस लेने वाली याचिका पर विचार करने के लिए सहमति जताई है।
वर्तमान में राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस दोनों ही इस विरोध प्रदर्शन की कमान संभालने की कोशिश कर रहे हैं।









