रिपोर्ट: विवेक शुक्ला
बाराबंकी के रामनगर में चल रही श्री राम कथा के चौथे दिन शुक्रवार को वक्ता अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने भगवान श्री राम के बचपन की लीलाओं, नामकरण संस्कार और अहिल्या के उद्धार का भावपूर्ण वर्णन किया। लगातार हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु भक्तिमय माहौल का अनुभव करने के लिए कार्यक्रम में शामिल हुए।
सत्र के दौरान भारद्वाज महाराज ने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति के चरित्र और जीवन की दिशा तय करने में बचपन के संस्कार अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने काकभुशुंडी की कहानी का जिक्र करते हुए बताया कि भगवान श्री राम के जन्म के बाद काकभुशुंडी ने प्रभु की बाल लीलाओं को देखने के लिए पांच साल तक अवध में रहने का संकल्प लिया था।
संस्कारों की महत्ता और अहिल्या उद्धार
वक्ता ने सूरदास के पदों का उपयोग करते हुए बताया कि काकभुशुंडी कोई साधारण कौआ नहीं थे और स्वयं भगवान भोलेनाथ भी उनसे श्री राम कथा सुनने आते थे। उन्होंने धूल में खेलते बाल श्री राम और माता कौशल्या द्वारा उन्हें गोद में लेने के दृश्यों का वर्णन किया। उन्होंने नामकरण संस्कार के महत्व को बताया, जो हिंदू धर्म के 16 पारंपरिक संस्कारों में से एक है।
महाराज ने तर्क दिया कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति को धर्म, मूल्यों, त्याग और परोपकार के लिए प्रेरित करे। उन्होंने समाज की कई बुराइयों का कारण मूल्य-आधारित शिक्षा की कमी को बताया। कथा में श्री राम और लक्ष्मण की विश्वामित्र के साथ वन यात्रा, ताड़का, मारीच और सुबाहु के वध और मिथिला जाते समय अहिल्या के उद्धार का भी वर्णन किया गया।
भारद्वाज महाराज ने समझाया कि इंसान से गलतियां हो सकती हैं, लेकिन मुक्ति का रास्ता पश्चाताप और क्षमा मांगने में है। उन्होंने कहा कि सच्चे दिल से गलतियों को स्वीकार करने से आध्यात्मिक शांति मिलती है। उन्होंने बताया कि पत्थर बनी अहिल्या केवल भगवान श्री राम के दर्शन से मुक्त हो गईं।
इस कार्यक्रम में मेजबान रविकांत पांडे, पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोपे, पूर्व विधायक रामगोपाल रावत, अधिवक्ता सतीश चंद्र शुक्ला, अविरल सिंह, पवन कुमार ओझा, पप्पू सिंह, प्रभात सिंह, हसमत अली, गुड्डू और प्रभात शुक्ला समेत अन्य लोग शामिल हुए, जिन्होंने वक्ता से आशीर्वाद लिया।









