एटा के एक निवासी अजय अपनी पुश्तैनी जमीन पर हुए कब्जे के मामले में न्याय पाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लेकर Superintendent of Police (SP) ऑफिस पहुंचे। उन्होंने इस विवाद में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
अजय का आरोप है कि कुछ स्थानीय दबंगों ने उनकी पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को सुलझाने के लिए वह कई बार स्थानीय पुलिस के पास गए, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार का आरोप
शिकायतकर्ता अजय के अनुसार, जब उन्होंने स्थानीय पुलिस से मदद मांगी तो उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय थाना प्रभारी (daroga) समेत अन्य पुलिस अधिकारियों ने उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया।
अजय का यह भी दावा है कि पुलिस अधिकारियों ने उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय उनके साथ गाली-गलौज की। पुलिस ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें एसपी ऑफिस जाना पड़ा।
प्रशासनिक निर्देश और शिकायत के रास्ते
हालांकि अजय की शिकायत की वर्तमान स्थिति पर अभी विस्तृत जानकारी मिलना बाकी है, लेकिन यह घटना क्षेत्र में जमीन कब्जाने की समस्याओं को उजागर करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य प्रशासन ने बार-बार कहा है कि अधिकारियों को संपत्ति विवादों को पारदर्शिता और तेजी से सुलझाना चाहिए।
प्रशासन ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि वास्तविक शिकायतों की अनदेखी की गई, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सरकार ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपनी शिकायतों के लिए तय माध्यमों का उपयोग करें।
- नागरिक Integrated Grievance Redressal System (IGRS) के जरिए अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।
- राजस्व संबंधी मामलों के लिए निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है।
एटा में पूर्व की कार्रवाइयां
एटा जिले में पहले भी जमीन कब्जाने के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। जिला प्रशासन ने पिछले मामलों में सख्त कदम उठाए हैं ताकि अवैध कब्जे को रोका जा सके।
प्रशासन ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को हटा दिया है और कोर्ट के आदेश पर एंटी-एनक्रोचमेंट ड्राइव चलाकर अवैध कब्जे हटवाए हैं। इन कदमों का उद्देश्य जमीन कब्जाने के दावों का सही समाधान करना था।









