भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की गिरती कीमत को नियंत्रित करने के लिए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के लिए एक समर्पित डॉलर विंडो की शुरुआत की है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को रुपया 96.73 पर बंद हुआ था, जबकि यह लगभग 96.96 प्रति डॉलर के अपने न्यूनतम स्तर के पास कारोबार कर रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट आई है। रविवार, 11 अक्टूबर तक की मार्केट रिपोर्ट के मुताबिक, रुपया प्रमुख एशियाई मुद्राओं में सबसे कमजोर मुद्राओं में से एक बनकर उभरा है।
डेरिवेटिव मार्केट के लिए नए कड़े नियम
बाजार में लगातार होने वाली पूंजी की निकासी और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये में अस्थिरता पैदा की है। इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक ने Foreign Exchange Management Act और RBI Act के तहत हस्तक्षेप किया है।
RBI सर्कुलर नंबर 25 में दिए गए नए निर्देशों के अनुसार, अब अधिकृत डीलर किसी भी रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को रद्द होने के बाद दोबारा बुक नहीं करने देंगे। हालांकि, कॉन्ट्रैक्ट की मैच्योरिटी पर रोलओवर की अनुमति बनी रहेगी।
बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर प्रूफ के हेजिंग की सीमा को 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से घटाकर अब 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है। अब अधिकृत डीलरों को विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा ताकि यह पुष्टि हो सके कि किसी क्लाइंट के उसी एक्सपोजर के लिए कोई दूसरा बैंक हेजिंग नहीं कर रहा है।
एक और महत्वपूर्ण नियम 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की नाममात्र वैल्यू वाले कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए Foreign Exchange Risk Reserve से जुड़ा है। इसके तहत बैंकों को इन लेनदेन के रुपये के बराबर मूल्य का 20 प्रतिशत कैश रिजर्व RBI के पास रखना होगा।
DBS Bank के ट्रेजरी हेड आशीष वैद्य ने कहा कि इस विशेष नियम की वजह से बड़े आयातकों के लिए हेजिंग पोजीशन लेना अब काफी महंगा हो जाएगा।
तेल कंपनियों के लिए डॉलर विंडो की सुविधा
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों को 12 अक्टूबर से एक नई राहत मिलने जा रही है। इसमें Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum Corporation Limited और Bharat Petroleum Corporation Limited जैसी कंपनियां शामिल हैं।
RBI अब निर्धारित बैंकों के माध्यम से इन कंपनियों को सीधे डॉलर बेचेगा, ताकि ओपन मार्केट पर दबाव कम किया जा सके। इस पहल का मुख्य उद्देश्य तेल से जुड़ी डॉलर की दैनिक मांग को पूरा करना है, जिसने ऐतिहासिक रूप से स्पॉट मार्केट पर दबाव बनाया है।
बाजार पर प्रभाव और विशेषज्ञों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि हेजिंग की लागत बढ़ने और तेल संबंधी मांग के हटने से शॉर्ट टर्म में फॉरवर्ड प्रीमियम कम हो सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने इन कदमों को बाजार में अनुशासन बढ़ाने और एक व्यवस्थित वित्तीय माहौल बनाए रखने के तंत्र के रूप में बताया है।
इस घोषणा के बाद बाजार के प्रतिभागियों ने नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड ट्रेडिंग पर नजर रखी, जिसमें रुपये की कीमत में संभावित सुधार के शुरुआती संकेत दिखे। हालांकि, इस बात को लेकर अनिश्चितता है कि तेल के लिए यह विशेष विंडो कितने समय तक चालू रहेगी।
विशेषज्ञ अब यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि बैंक बिना किसी रुकावट के नए दस्तावेजीकरण नियमों को कैसे लागू करेंगे, ताकि कॉरपोरेट हेजिंग प्रभावित न हो।
- भविष्य के कदम इस बात पर निर्भर करेंगे कि क्या ये बदलाव वैश्विक डॉलर की मजबूती और भारतीय बाजारों से पूंजी की निकासी को रोकने में सक्षम हैं।
- इस पूरे पैकेज की प्रभावशीलता की निगरानी RBI द्वारा लगातार की जाएगी।
इन आदेशों से जुड़ी विस्तृत जानकारी केंद्रीय बैंक द्वारा 10 अक्टूबर को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों में उपलब्ध है। बाजार के माहौल से जुड़ी अन्य जानकारियां The Economic Times, Business Standard, Moneycontrol और The Hindu की रिपोर्टों पर आधारित हैं।

























