दिल्ली में चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध जताने के लिए बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें पुलिस और Bharatiya Janata Party के समर्थकों द्वारा शारीरिक बल का सामना करना पड़ा।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस प्रदर्शन में शामिल लोग गुस्से के बजाय शांति के इरादे से मार्च कर रहे थे। यह पूरा विरोध प्रदर्शन कथित चुनावी कदाचार और धांधली के खिलाफ किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में ज्ञापन सौंपने की योजना
प्रदर्शनकारियों ने अब सोमवार, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकालने का फैसला किया है। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग पार्टियों, लिंग, जाति, समुदाय और राज्यों की सीमाओं से ऊपर उठकर नागरिकों को एकजुट करना है।
इस अभियान में युवा, विपक्षी पार्टियां, सिविल सोसाइटी ग्रुप और संविधान की रक्षा करने वाले लोग शामिल होंगे। ये सभी लोग मिलकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) को एक ज्ञापन सौंपेंगे।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें और चुनौतियां
समूह ने अपनी मांगों की एक सूची जारी की है जिसे वे न्यायपालिका के सामने रखेंगे। वोटों की कथित चोरी को रोकने की मांग इस प्रदर्शन का केंद्र है।
- कथित वोट चोरी की प्रक्रिया को तुरंत बंद किया जाए।
- Systematic Integrated Reporting (SIR) प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
- चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar अपने पद से इस्तीफा दें।
राष्ट्रीय एकता और नेताओं को सीधी चुनौती
आयोजकों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval और Rashtriya Swayamsevak Sangh प्रमुख Mohan Bhagwat को सीधी चुनौती दी है। उनका कहना है कि ये दिग्गज लोग देश की आवाज को दबा नहीं सकते।
समूह ने घोषणा की है कि वे किसी भी तरह की धमकी से डरेंगे नहीं। उन्होंने ‘Daro mat’ (डरो मत) के नारे का इस्तेमाल करते हुए भाईचारे और देशभक्ति के आधार पर राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया है।

























