समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वाराणसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशासन पर चुनाव नतीजों में हेरफेर करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मतगणना के दौरान उन्हें और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को तीन दिन और दो रात तक जगाकर रखा गया।
यादव ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने चंडीगढ़ की तरह ही पैंतरे अपनाने की कोशिश की, लेकिन वाराणसी में उनके ये प्रयास विफल रहे। उन्होंने दावा किया कि बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद उनकी पार्टी के साथ था और मणिकर्णिका घाट की विरासत के साथ छेड़छाड़ की कोशिश के लिए उन्हें सजा मिली।
वाराणसी के विकास का विजन
अखिलेश यादव ने शहर के लिए विकास योजना पेश करते हुए वादा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार वाराणसी में मेट्रो सिस्टम लाएगी। उन्होंने कहा कि वे वरुणा नदी को साबरमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट से भी बेहतर मॉडल में बदल देंगे।
उनका तर्क था कि यदि मेट्रो सिस्टम पहले लागू किया गया होता, तो दालमंडी इलाके में तोड़फोड़ को रोका जा सकता था। इसके अलावा, उन्होंने वर्तमान सरकार पर शहर को बाहरी ठेकेदारों के हवाले करने और स्थानीय किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया।
राजनीतिक समीकरण और 2027 चुनाव
राजनीतिक संभावनाओं पर बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि MLC चुनाव के बाद 200 लोगों के वर्तमान पद जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सीटों के वितरण के लिए चुनावी जीत ही प्राथमिक मानदंड होना चाहिए।
उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि समाजवादी पार्टी का कोई MLA ओम प्रकाश राजभर के संपर्क में है। 2027 विधानसभा चुनावों की ओर देखते हुए यादव ने घोषणा की कि वाराणसी का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी वर्तमान मंत्री अपना टिकट खो देंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा के प्रति भाजपा की नीतियों से जनता में असंतोष है, जिससे राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आएगा।









