बाराबंकी के पलहारी स्थित श्री कपिल मुनि योग और मेडिटेशन सेंटर में भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाई गई। इस दौरान सरदार पटेल के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए और वक्ताओं ने उनके जीवन, संघर्ष, देशभक्ति और भारत की एकता व अखंडता में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शिव मंदिर के केयरटेकर हनुमान प्रसाद ने की, जबकि मुख्य अतिथि व्यवसायी और योग केंद्र के संस्थापक सदस्य वंशराज वर्मा थे। कार्यक्रम में गेस्ट ऑफ ऑनर और योग विशेषज्ञ डॉ. शशि कुमार अवस्थी, समाजसेवी रत्नेश कुमार, सुशील कुमार, सुधीर कांत मौर्य और शिक्षक अशोक कुमार वर्मा व रामानंद वर्मा भी शामिल रहे। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. रामसमुझ वर्मा ने किया और आयोजन संतोष चौधरी द्वारा किया गया।
सरदार पटेल के योगदान और उपलब्धियां
वक्ताओं ने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। 1928 के बारडोली सत्याग्रह में किसानों का सफल नेतृत्व करने के बाद उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली थी।
स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 565 रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने वी.पी. मेनन के सहयोग से अपने दृढ़ संकल्प, कूटनीति और दूरदर्शिता से जूनागढ़ और हैदराबाद के एकीकरण जैसी जटिल चुनौतियों को हल किया।
- प्रतिभागियों ने पटेल को आधुनिक भारत के महान राष्ट्र निर्माता बताया जिन्होंने एक मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था की नींव रखी।
- उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
- उनकी जयंती प्रतिवर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है।
समाजसेवी रत्नेश कुमार और अन्य वक्ताओं ने जोर दिया कि सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करें। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सरदार पटेल के सपनों का मजबूत, सामंजस्यपूर्ण और एकीकृत भारत बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर योग केंद्र के बड़ी संख्या में सदस्य, समाजसेवी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।









