लखनऊ के सादतगंज इलाके में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने सड़क जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है, जिससे इलाके में तनाव बना हुआ है।
मृतकों की पहचान 62 वर्षीय सेवानिवृत्त सचिवालय कर्मचारी शिवाजी तिवारी, उनके 55 वर्षीय भाई शंभू (जिन्हें शिवेंद्र तिवारी के नाम से भी जाना जाता है) और उनके 30 वर्षीय बेटे सुयश तिवारी के रूप में हुई है। सुयश तिवारी की शादी 5 दिसंबर को होने वाली थी।
पार्किंग विवाद और वारदात की वजह
यह ट्रिपल मर्डर सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को हुआ। पुलिस के अनुसार, यह पूरी घटना ब्रह्मणी टोला के नौबस्ता इलाके में कार पार्किंग और एक बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरा बनाने को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का नतीजा थी।
मुख्य आरोपी 30 वर्षीय पूर्व मर्चेंट नेवी ऑफिसर ऋषभ शुक्ला है। उसने एक अवैध पिस्तौल से फायरिंग की थी। पुलिस ने ऋषभ शुक्ला को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया, जिसके पास से एक पिस्तौल और चार खाली कारतूस बरामद हुए हैं।
आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई
इस मामले में पुलिस ने अब तक कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। ऋषभ शुक्ला के अलावा उसकी बहनों प्रीति, अदिति और दिव्या, उसके पिता दिनेश शुक्ला और उसके चाचाओं राजेश और गिरीश शुक्ला पर भी आरोप लगे हैं।
पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा ने इन गिरफ्तारियों की पुष्टि की है। उन्होंने लापरवाही के आरोप में सादतगंज स्टेशन हाउस ऑफिसर और स्थानीय चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया है।
प्रदर्शनकारियों की मांगें और मेडिकल रिपोर्ट
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन के सामने कई कड़ी मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:
- आरोपियों को मौत की सजा दी जाए।
- आरोपियों की संपत्ति पर बुलडोजर चलाया जाए।
- दोषियों का एनकाउंटर किया जाए।
- मृतक की बेटी को सरकारी नौकरी दी जाए।
- एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (वेस्ट) जितेंद्र ने बताया कि यह घटना दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का परिणाम थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, शिवाजी और सुयश तिवारी के सिर, छाती और पेट में गोली लगने के निशान मिले हैं।
पुलिस की भारी संख्या में फोर्स इलाके में तैनात कर दी गई है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और जांच आगे बढ़ सके।









