लखनऊ नगर निगम ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को कैसरबाग कोर्ट के पास स्थित वकीलों के अवैध चैंबरों के खिलाफ एक बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए प्रशासन ने 10 बुलडोजर और 10 हाइवा ट्रकों को तैनात किया था।
यह ऑपरेशन इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जारी किए गए निर्देशों के पालन में किया जा रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने भी इन चैंबरों को हटाने के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था। ये चैंबर लखनऊ जिला कोर्ट के पास सार्वजनिक जमीन पर बनाए गए थे।
अवैध निर्माण और कानूनी कार्रवाई
नगर निगम के इस अभियान का लक्ष्य उन अवैध ढांचों को गिराना है जिनकी संख्या 200 से 245 के बीच है। इन सभी अवैध निर्माणों को पहले ही लाल रंग के पेंट से चिह्नित किया गया था और प्रशासन द्वारा आधिकारिक नोटिस भी जारी किए गए थे।
इस कार्रवाई को रोकने के लिए वकीलों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। जब मशीनें मौके पर पहुंचीं, तो प्रदर्शन कर रहे वकील बुलडोजरों के सामने सड़क पर लेट गए और कुछ वकील गाड़ियों के ऊपर चढ़ गए ताकि ऑपरेशन को रोका जा सके।
प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन और सुरक्षा इंतजाम
प्रदर्शनकारी वकीलों ने जिला प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबल (PAC) की तैनाती की गई थी।
विरोध कर रहे कानूनी पेशेवरों की ओर से एडवोकेट बलराम जाखड़ ने कहा कि प्रशासन मनमाने ढंग से काम कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई से कम से कम 2,000 वकील प्रभावित होंगे, जिससे उनके परिवारों के लिए यह दिवाली अंधेरी होगी।
वकीलों की मांग और पुराना विवाद
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने यह स्पष्ट किया कि वे कानून के पालन के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने प्रशासन के सामने यह मांग रखी कि उनके पेशेवर काम के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए।
इस तरह का ध्वस्तीकरण अभियान इस साल मई और अगस्त में भी चलाने की कोशिश की गई थी। उन मौकों पर बार एसोसिएशन के कड़े विरोध के कारण कार्रवाई को रोकना पड़ा था। प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने चेतावनी दी है कि वे प्रशासन की इन कार्रवाइयों का जवाब 2027 के चुनावी चक्र के दौरान देंगे।









