भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट यानी वस्तु निर्यात में सितंबर 2026 में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले इसमें 23.04 प्रतिशत का उछाल आया है, जिससे कुल निर्यात 44.40 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
इस बड़ी बढ़त का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनिक सामान और इंजीनियरिंग गुड्स की मांग में हुई वृद्धि है। इस उछाल की वजह से मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा कम होकर 30.21 बिलियन डॉलर रह गया है, जो सितंबर 2025 में 33 बिलियन डॉलर था।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 15 अक्टूबर को जारी किए गए प्रोविजनल डेटा में इस बढ़त की पुष्टि की है। इसी समय के दौरान आयात में भी 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसके बाद कुल आयात 74.61 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
निर्यात के आंकड़े और सरकारी रिपोर्ट
ये सभी आंकड़े Directorate General of Commercial Intelligence and Statistics द्वारा जारी किए गए हैं। कॉमर्स Secretary Rajesh Agrawal ने हाल ही में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इन नतीजों को पेश किया। उन्होंने बताया कि जुलाई से सितंबर तक का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट किसी भी दूसरी तिमाही के लिए रिकॉर्ड स्तर पर रहा है।
सितंबर महीने के लिए अनुमानित सेवाओं सहित कुल निर्यात 80.75 बिलियन डॉलर रहा है। यह आंकड़ा एक साल पहले की तुलना में 10.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
विभिन्न सेक्टरों का प्रदर्शन और आयात में बदलाव
सितंबर 2026 तक की ग्रोथ में कुछ खास उद्योगों का बड़ा योगदान रहा है। इलेक्ट्रॉनिक सामान के निर्यात में 70.44 प्रतिशत की भारी बढ़त देखी गई, जो बढ़कर 5.31 बिलियन डॉलर हो गया। इंजीनियरिंग गुड्स के निर्यात में 20.91 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 12.17 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में 31.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो लगभग 6.2 बिलियन डॉलर रहा। वहीं केमिकल्स सेक्टर में 24.21 प्रतिशत का विस्तार हुआ, जिससे यह करीब 3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
आयात के मोर्चे पर कुछ महत्वपूर्ण गिरावटें भी दर्ज की गईं:
- सोने के आयात में 81.27 प्रतिशत की भारी गिरावट आई और यह 1.8 बिलियन डॉलर रह गया।
- चांदी के आयात में 49.11 प्रतिशत की कमी आई, जो 665 मिलियन डॉलर रहा।
इन गिरावटों ने कच्चे तेल (crude oil) के आयात में हुई 30.76 प्रतिशत की वृद्धि की भरपाई करने में मदद की है। कच्चे तेल का आयात बढ़कर 18.34 बिलियन डॉलर हो गया है, जिसका कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से वैश्विक कीमतों का बढ़ना है।
The Hindu, Mint, Business Standard, The Tribune और CNBC TV18 जैसे कई स्वतंत्र मीडिया संस्थानों ने इन आंकड़ों को लगातार रिपोर्ट किया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इन भरोसेमंद स्रोतों के बीच कोई भौतिक विसंगति नहीं है।
भविष्य का लक्ष्य और वैश्विक बाजार
Federation of Indian Export Organisations के अध्यक्ष S.C. Ralhan ने इस प्रदर्शन को प्रतिस्पर्धात्मकता की एक उत्साहजनक पुष्टि बताया है। उनका मानना है कि यह प्रदर्शन सरकार के वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य की ओर एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
कॉमर्स Secretary Agrawal ने उम्मीद जताई कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 500 बिलियन डॉलर के पार जा सकता है। साल की पहली छमाही में अमेरिका मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ा गंतव्य बना रहा।
विकास के आंकड़ों में चीन और सिंगापुर का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। अब पॉलिसी मेकर्स का ध्यान अक्टूबर और नवंबर के डेटा पर है, ताकि यह देखा जा सके कि त्योहारी सीजन के दौरान यह रफ्तार बनी रहती है या नहीं। आने वाली रिपोर्टों से यह तय होगा कि इन लाभों का घरेलू रोजगार और वैल्यू एडिशन पर सटीक प्रभाव क्या पड़ा है।

























