उत्तराखंड सरकार ने राज्य में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू या निकोटीन युक्त अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है। यह रोक आधिकारिक तौर पर 13 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई है और यह 13 अक्टूबर 2027 तक प्रभावी रहेगी।
इस संबंध में निर्देश खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन के कमिश्नर विनय शंकर पांडे द्वारा जारी किए गए हैं। यह पूरी कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत की गई है।
इस प्रतिबंध के लिए अधिनियम की धारा 92 और 30(2) के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर प्रतिबंध और सीमा) विनियमन 2011 के नियम 2.3.4 का हवाला दिया गया है। यह नियम स्पष्ट रूप से खाद्य सामग्री के रूप में तंबाकू और निकोटीन के उपयोग को प्रतिबंधित करता है।
युवा पीढ़ी को नशे से बचाने की पहल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि यह फैसला एक वार्षिक समीक्षा प्रक्रिया के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार इस नतीजे पर पहुंची कि युवा पीढ़ी को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए ऐसे उत्पादों पर रोक लगाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यह नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस लक्ष्य के अनुरूप है जिसमें देश के युवाओं को ड्रग्स और नशीले पदार्थों के गलत रास्ते पर जाने से बचाने की बात कही गई है। धामी ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि माना जाता है और राज्य प्रशासन हर स्तर पर नशा विरोधी उपायों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजस्व के नुकसान से ऊपर जन स्वास्थ्य
सरकार ने इस फैसले में आर्थिक कमाई के बजाय जनता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है। अनुमान लगाया गया है कि इस प्रतिबंध के कारण वार्षिक GST संग्रह में लगभग 40 करोड़ रुपये की कमी आएगी।
इसके अलावा, इस कदम से बिजनेस टर्नओवर में 100 करोड़ रुपये के नुकसान की संभावना जताई गई है। उत्तराखंड इस साल ऐसा प्रतिबंध लगाने वाला देश का पांचवा राज्य बन गया है।
नशा मुक्ति के लिए अन्य कड़े कदम
इस नियम के अलावा सरकार राज्य में नशा विरोधी अन्य अभियान भी चला रही है। इसके तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- शैक्षणिक संस्थानों में जांच की प्रक्रिया को बढ़ाया गया है।
- संवेदनशील इलाकों की GIS मैपिंग की जा रही है।
- सक्रिय नशा विरोधी कमेटियों का गठन किया गया है।
इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी गई है। प्रशासन इस बात को लेकर सतर्क है कि पड़ोसी राज्यों से इन प्रतिबंधित सामानों की तस्करी न हो, जहां ये उत्पाद अभी भी कानूनी हो सकते हैं।









