Hitachi Energy भारत में अपने निवेश को और बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने यह कदम पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया है। इस विस्तार का मुख्य केंद्र चेन्नई हब को बनाया गया है।
यह विस्तार कंपनी की एक बड़ी कॉर्पोरेट रणनीति का हिस्सा है। इसका मकसद घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय निर्यात की जरूरतों को भी पूरा करना है।
CEO Andreas Schierenbeck ने 13 अक्टूबर 2026 को CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में इन विकास योजनाओं की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भारत वर्तमान में दुनिया भर में कंपनी के टॉप पांच ग्रोथ मार्केट में शामिल है।
पावर ग्रिड की बढ़ती मांग और भविष्य की योजनाएं
कंपनी के अनुसार, वर्तमान में चल रहा ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी सुपरसाइकिल इस बढ़ी हुई गतिविधि का मुख्य कारण है। Hitachi Energy को उम्मीद है कि उच्च मांग का यह दौर अगले 10 से 15 वर्षों तक जारी रहेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ते बदलाव ने मजबूत ग्रिड की जरूरत को और बढ़ा दिया है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए कंपनी अपनी क्षमताओं को बढ़ा रही है।
क्षेत्रीय संचालन और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
कंपनी अपने संचालन को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए कई खास पहल कर रही है। इन प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करने के लिए चेन्नई स्थित एक इंजीनियरिंग सेंटर में पहले ही 2,000 नए कर्मचारियों की भर्ती की जा चुकी है।
इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करने के लिए वडोदरा में 2,000 करोड़ रुपये के ट्रांसफार्मर प्लांट की पुष्टि भी पहले की रिपोर्ट्स में की गई थी। Andreas Schierenbeck ने स्पष्ट किया कि यदि ग्राहक स्पष्ट प्रतिबद्धता देते हैं, तो क्षमता में और विस्तार संभव है।
कंपनी की रणनीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- कंपनी ‘इंडिया फॉर इंडिया’ और ‘इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ की रणनीति पर काम कर रही है।
- इसका उद्देश्य स्थानीय आपूर्ति जरूरतों और निर्यात लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना है।
- यह दृष्टिकोण 500GW नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता तक पहुंचने के राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करता है।
उद्योगों और डेटा ऑपरेटरों के बिना किसी रुकावट के काम करने के लिए एक भरोसेमंद ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत जरूरी आधार है। पावर सेक्टर के हितधारक इन विकास कार्यों पर नजर रख रहे हैं क्योंकि ग्रिड क्षमता का सीधा असर प्रोजेक्ट की समयसीमा पर पड़ता है। मांग के साथ तालमेल न बिठा पाने की स्थिति में बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में काफी देरी हो सकती है।
आगामी निवेश और रोजगार के अवसर
कंपनी आने वाले समय में पूंजी लगाने के पैमाने को लेकर एक लचीला दृष्टिकोण अपना रही है। अभी तक किसी नए निवेश की सटीक राशि या भौगोलिक स्थानों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन आंतरिक टीमें लगातार नए ऑर्डर्स की निगरानी कर रही हैं।
भविष्य की घोषणाएं काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगी कि वर्तमान मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का उपयोग कितनी तेजी से किया जाता है। इन प्रोजेक्ट्स के सफल कार्यान्वयन से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम मजबूत होगा।
Hitachi Energy यह सुनिश्चित करने के लिए अपने पाइपलाइन का मूल्यांकन कर रही है कि ग्रिड उपकरणों का उत्पादन ऊर्जा संक्रमण की तीव्रता के अनुरूप हो। आने वाले महीने अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर रोलआउट की समयसीमा तय करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।









