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शाहजहाँपुर जिला जेल में कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित, कैदियों को बताए गए उनके कानूनी अधिकार

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Naradsamvad - Narad news Agency
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शाहजहाँपुर जिला जेल में मंगलवार को महीने में एक बार आयोजित होने वाले कानूनी साक्षरता और जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती अपेक्षा सिंह ने की।

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शिविर के दौरान सचिव श्रीमती अपेक्षा सिंह ने जेल में बंद कैदियों को प्ली बारगेनिंग, न्यायिक प्रक्रियाओं और उनके कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को कानून की बारीकियों से अवगत कराया।

श्रीमती अपेक्षा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायिक प्रणाली का मुख्य उद्देश्य हर व्यक्ति के लिए निष्पक्ष, सुलभ और समय पर न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय तक सबकी पहुंच होनी चाहिए।

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प्ली बारगेनिंग और कानूनी सहायता की जानकारी

सचिव अपेक्षा सिंह ने बताया कि प्ली बारगेनिंग आपराधिक न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जरिए योग्य आरोपी अपनी मर्जी से अपना अपराध स्वीकार कर सकते हैं, जिससे उनके मामलों का निपटारा तेजी से हो जाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्ली बारगेनिंग के लिए आरोपी की स्वतंत्र सहमति और अदालत की संतुष्टि होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने कैदियों से अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और मुफ्त कानूनी सहायता सेवाओं का लाभ उठाने की अपील की।

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विशेषज्ञों ने साझा किए कानूनी नियम

सत्र के दौरान LADCS के प्रमुख दिनेश मिश्रा ने प्ली बारगेनिंग के लिए पात्रता मानदंडों और आवेदन की पूरी प्रक्रिया समझाई। वहीं डिप्टी चीफ विवेक शर्मा ने मुफ्त कानूनी सहायता और न्यायिक अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

विशेषज्ञ मध्यस्थ मनोज मिश्रा ने न्यायिक प्रक्रिया के भीतर संचार, सहमति और पीड़ितों के हितों की सुरक्षा के महत्व पर चर्चा की। वहीं विशेषज्ञ मध्यस्थ डी.के. श्रीवास्तव ने कानूनी और सौहार्दपूर्ण विवाद समाधान की उपयोगिता पर जोर दिया।

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न्याय तक पहुंच और जेल प्रशासन का नजरिया

जेल अधीक्षक जे.पी. तिवारी ने कार्यक्रम में कहा कि इस तरह के नियमित शिविर कैदियों को उनके अधिकारों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कैदियों को न्याय तक पहुंच मिल सके।

कार्यक्रम का समापन कानूनी जागरूकता को सुलभ न्याय की आधारशिला बताकर किया गया। इसमें कैदियों को प्रोत्साहित किया गया कि वे कानून के तहत उपलब्ध अपने कानूनी अधिकारों का पूरा उपयोग करें।

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