National Payments Corporation of India ने चुनिंदा Unified Payments Interface ट्रांजैक्शन पर लगने वाले 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate के लागू होने की तारीख को दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया है। यह फैसला त्योहारी सीजन में खरीदारी के चरम समय के दौरान व्यापारियों को बड़ी राहत देने के लिए लिया गया है। नए शुल्कों के लागू होने के समय को लेकर उठ रही चिंताओं के बाद यह कदम उठाया गया है।
NPCI की UPI और Services Steering Committee ने 13 अक्टूबर, 2026 को इस फैसले पर मुहर लगाई। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान के जरिए सामने आई है, जिसे The Economic Times, Mint, The Hindu, Times of India और Indian Express ने रिपोर्ट किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस शुल्क को लागू करने की सटीक तारीख की घोषणा त्योहारी सीजन खत्म होने के बाद अलग से की जाएगी।
शुरुआती योजना के मुताबिक, इन शुल्कों को 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होना था। यह समय सीमा NPCI द्वारा 15 सितंबर, 2026 के आसपास जारी किए गए एक सर्कुलर के बाद तय की गई थी। इस पूरी प्रक्रिया को Payment and Settlement Systems Act, 2007 के एक संशोधन का समर्थन प्राप्त था।
नया शुल्क ढांचा और लागू होने वाली शर्तें
प्रस्तावित ढांचे में उन सीमाओं का विवरण दिया गया है, जिनके आधार पर 0.4 प्रतिशत या 40 बेसिस पॉइंट्स की दर लागू होगी। यह शुल्क उन ट्रांजैक्शन पर लगेगा जो बैंक खाते से मर्चेंट को 2,000 रुपये से अधिक की राशि भेजते हैं। सरकारी और NPCI के बयानों के अनुसार, यदि ट्रांजैक्शन की राशि 75,000 रुपये या उससे अधिक होती है, तो प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 300 रुपये का शुल्क लगेगा।
कुछ सार्वजनिक सेवाओं और जरूरी श्रेणियों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। ईंधन, टेलीकॉम सेवाएं, रेलवे और बीमा जैसे सेक्टरों में 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर प्रतिशत आधारित दर के बजाय 5 रुपये का फ्लैट शुल्क लगेगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कैपिटल मार्केट पेमेंट के लिए यह दर घटाकर 0.02 प्रतिशत की जा सकती है।
छोटे प्रतिभागियों के हितों की रक्षा के लिए कई श्रेणियों को इन शुल्कों से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। इसके तहत निम्नलिखित नियम लागू रहेंगे:
- एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (Person to person) को किए गए ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
- 2,000 रुपये तक के सभी भुगतान मुफ्त रहेंगे।
- ऐसे छोटे मर्चेंट जो वर्तमान ढांचे के तहत UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं, उन्हें MDR नहीं देना होगा।
यह साफ किया गया है कि MDR का पूरा खर्च मर्चेंट को उठाना होगा और वे यह शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूल सकते। आम जनता के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त रहेगा, ताकि उपभोक्ता सीधे किसी भी शुल्क से प्रभावित न हों।
आर्थिक प्रभाव और इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया
NPCI के CEO Dilip Asbe ने पहले यह समझाया था कि UPI इकोसिस्टम को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए सालाना लगभग 21,000 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। इस शुल्क को लागू करने का मुख्य उद्देश्य संचालन के पहले साल में 13,000 से 15,000 करोड़ रुपये की वसूली करना है। अधिकारियों का मानना है कि वॉल्यूम के हिसाब से मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लगभग 95 से 96 प्रतिशत हिस्से पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा।
देशभर के मर्चेंट संगठनों, जिनमें केरल के समूह और राष्ट्रीय रिटेल संगठन शामिल हैं, ने 15 अक्टूबर की मूल समय सीमा का विरोध किया था। उन्होंने परिचालन तैयारी और साल के सबसे व्यस्त समय में व्यवसायों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी। मानक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर को पड़ रही है।
इस देरी की खबर आने के बाद फिनटेक कंपनियों के शेयरों की कीमतों में उछाल देखा गया। पेमेंट इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि एक सीमित और कैप्ड शुल्क वास्तविक समय भुगतान प्रणालियों के वैश्विक मानकों के अनुरूप है। उनका तर्क है कि सरकारी सब्सिडी के सालों के बाद यह कदम लंबी अवधि की स्थिरता सुनिश्चित करेगा।
सरकारी अधिकारियों ने यह बात दोहराई है कि यह दर पारंपरिक कार्ड आधारित सिस्टम में लगने वाली दरों से काफी कम है। अब NPCI द्वारा सटीक शुरुआत की तारीख अधिसूचित की जाएगी। इससे स्टेकहोल्डर्स को अपने सिस्टम को अपग्रेड करने और बदलाव के लिए तैयार होने का अतिरिक्त समय मिल गया है। उम्मीद है कि त्योहार के बाद शुल्क लागू होने पर रेगुलेटर इकोसिस्टम की बारीकी से निगरानी करेंगे।









