उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर प्रदीप शुक्ला पुलिस की गिरफ्त में है। 10 अक्टूबर 2026 को हरदोई और झांसी पुलिस ने एक साझा ऑपरेशन चलाकर उसे गिरफ्तार किया। प्रदीप शुक्ला हरदोई के कोतवाली सिटी इलाके के चौहान थोक का रहने वाला है।
वह पिछले लगभग 8 से 26 सालों से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, लूट और मारपीट जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। हरदोई जिला अदालत ने उसकी गिरफ्तारी के लिए स्थायी वारंट जारी किए थे।
बदली पहचान और काली सरकार का रूप
हरदोई से भागने के बाद प्रदीप शुक्ला ने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली थी। बताया गया है कि उसने पहले कानपुर में रत्नों के व्यापार में काम किया और फिर झांसी चला गया। वहां उसने अपना नाम बदलकर ‘सत्यानंद शुक्ला’ रख लिया।
झांसी में उसने ‘काली सरकार’ का रूप धारण कर लिया था। वह मऊरानीपुर क्षेत्र के कुरैचा गांव के एक मंदिर से अपना कामकाज चला रहा था। वह सैन्य शैली की पोशाक पहनकर ‘दिव्य दरबार’ लगाता था, जिससे वह काफी चर्चा में आ गया था।
अंधविश्वास और सोशल मीडिया का खेल
प्रदीप शुक्ला दावा करता था कि उसके पास अलौकिक शक्तियां हैं। वह लोगों से कहता था कि वह बीमारियों को ठीक कर सकता है और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं को सुलझा सकता है। वह ‘पर्ची’ के जरिए भविष्य बताने का दावा भी करता था।
उसने अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। उसके फेसबुक पर 3,00,000 से अधिक और इंस्टाग्राम पर 1,00,000 से ज्यादा फॉलोअर्स थे। पुलिस के मुताबिक वह वीडियो पोस्ट कर लोगों को ठगता था।
नवरात्रि के पहले दिन हुई गिरफ्तारी
प्रदीप शुक्ला ने नवरात्रि उत्सव के कारण अपने दरबार को नौ दिनों के लिए बंद रखने की घोषणा की थी। हालांकि, पुलिस ने उसे त्योहार के पहले ही दिन पकड़ लिया। उसे झांसी और सिटी कोतवाली पुलिस ने मिलकर गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद उसे वापस हरदोई लाया गया।
- उसे कानूनी प्रक्रिया से गुजारा गया।
- बाद में उसे जेल भेज दिया गया।









