Skip to main content

Naradsamvad

वोटर लिस्ट संशोधन पर INDIA गठबंधन की बैठक से CJI सूर्या कांत ने किया इनकार, विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट मार्च

Naradsamvad
Naradsamvad - Narad news Agency
6 Min Read

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत ने 12 अक्टूबर 2026 को होने वाली एक बैठक के लिए INDIA गठबंधन के नेताओं द्वारा भेजे गए अनुरोध को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया है। यह फैसला उस समय आया है जब विपक्षी सदस्य चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट (निर्वाचन नामावली) के संशोधन की प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की योजना बना रहे थे।

Ad image

द हिंदू, इकोनॉमिक टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडिया टुडे, बार एंड बेंच, लाइव लॉ और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टों के अनुसार, यह इनकार ईमेल के जरिए बताया गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित अन्य नेताओं ने शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच बैठक का समय मांगा था।

मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय ने इस बैठक से मना करने के पीछे न्यायिक मर्यादा के सिद्धांतों और शक्तियों के पृथक्करण का हवाला दिया है। कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, इसलिए ऐसी बैठक संभव नहीं है।

वोटर लिस्ट संशोधन और चुनाव आयोग की कार्रवाई

इस पूरे विवाद की जड़ भारतीय चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा ‘विशेष गहन संशोधन’ (Special Intensive Revision) अभियान है। चुनाव आयोग ने इस कार्यक्रम की शुरुआत देश की विशाल वोटर लिस्ट को शुद्ध करने के उद्देश्य से की थी। आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, ड्राफ्ट लिस्ट के तहत लगभग 13.3 करोड़ नामों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है।

ALSO READ  राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दी खुली बहस की चुनौती, डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों पर लगाया गंभीर आरोप

इन आंकड़ों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है कि लगभग 2.8 करोड़ नाम मृत व्यक्तियों के हैं, 3 करोड़ लोग अनुपस्थित या लापता हैं, 6.3 करोड़ लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं और 1 करोड़ प्रविष्टियां डुप्लिकेट हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने यह साफ किया है कि ये आंकड़े अंतिम विलोपन या नाम हटाने की सूची नहीं हैं।

अधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक प्रारंभिक चरण है। इसमें पात्र मतदाताओं के पास स्थापित दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के माध्यम से दोबारा पंजीकरण कराने का पूरा अवसर उपलब्ध है।

विपक्ष के आरोप और दिल्ली में प्रदर्शन

विपक्षी दलों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक युवाओं के समूह का दावा है कि इस संशोधन प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया है। उनका तर्क है कि इसका सबसे बुरा असर प्रवासी मजदूरों, कुछ खास समुदायों और विपक्ष के समर्थकों पर पड़ा है। कुछ विश्लेषणों में यह बात सामने आई है कि दिल्ली जैसे राज्यों में नाम हटाने का प्रतिशत लगभग 32 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

ALSO READ  एटा पुलिस और SOG की मुठभेड़, चोरी की लाइसेंसी बंदूक के साथ तीन आरोपी गिरफ्तार

इस अभियान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन 10 और 11 अक्टूबर के सप्ताहांत के दौरान काफी तेज हो गए थे। दिल्ली प्रशासन ने इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए पाबंदियां लगाईं, जिसके कारण हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट एक्सेस में भी बाधाएं पैदा की गईं।

इन परिस्थितियों के कारण सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष सुनवाई हुई, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। कोर्ट ने 11 अक्टूबर को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की कोई अवैध हिरासत न हो। अदालत ने कानून-व्यवस्था की सामान्य शर्तों के साथ मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाओं को तुरंत बहाल करने का आदेश दिया।

कानूनी रास्ता और राजनीतिक मांगें

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह भी आदेश दिया कि वकीलों और पत्रकारों को बिना किसी रुकावट के अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने दिया जाए। इन सभी निर्देशों के पालन की रिपोर्ट 13 अक्टूबर तक जमा करने को कहा गया है। हालांकि कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को कुछ राहत दी है, लेकिन मुख्य न्यायाधीश द्वारा प्रशासनिक बैठक से इनकार करने के बाद अब विपक्ष का ध्यान औपचारिक न्यायिक याचिकाओं की ओर मुड़ गया है।

ALSO READ  उत्तराखंड के केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन, लखनऊ की दो सगी बहनों समेत चार की मौत

कॉकरोच जनता पार्टी अपनी मांगों पर अड़ी हुई है और उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो।
  • विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।
  • दोबारा पेपर बैलट (कागजी मतपत्रों) का उपयोग शुरू किया जाए।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विरोध प्रदर्शन युवा सक्रियता और पारंपरिक विपक्षी रणनीति का एक दुर्लभ मेल है, जो 2027 के चुनावी चक्र से पहले सरकार की प्रतिक्रियाओं को परख रहे हैं। INDIA गठबंधन आज भी सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां वे इस प्रक्रिया को ‘वोट चोरी’ बताते हुए एक ज्ञापन सौंपेंगे।

जब तक यह प्रक्रिया जारी है, आम नागरिकों के बीच अपने वोटर रजिस्ट्रेशन की सटीकता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सरकार का कहना है कि फर्जी मतदान को कम करने और संस्थागत ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए यह संशोधन जरूरी है। फिलहाल, प्रशासनिक अपडेट और अनुच्छेद 326 के तहत मतदान अधिकारों के संरक्षण के बीच इस टकराव में कानूनी व्यवस्था ही मुख्य निर्णायक बनी हुई है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Search
अपना ज़िला चुनें
error: Content is protected !!