सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने 11 अक्टूबर, 2026 को अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों की अवैध हिरासत को रोकें। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहें।
यह हस्तक्षेप राजधानी में मचे भारी बवाल के बाद किया गया है। Cockroach Janta Party और अन्य समूहों ने वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision को लेकर Election Commission of India को चुनौती दी है।
आलोचकों का आरोप है कि 2025 के दौरान चरणों में शुरू हुई गहन सत्यापन प्रक्रिया की वजह से लाखों असली मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। विपक्षी नेताओं द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं।
वोटर लिस्ट में कटौती और चुनाव आयोग का पक्ष
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 33 प्रतिशत की कमी देखी गई है। Election Commission का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया वोटर लिस्ट को शुद्ध करने और केवल पात्र नागरिकों के पंजीकरण को सुनिश्चित करने का एक संवैधानिक कर्तव्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में इस पूरी प्रक्रिया की वैधता को बरकरार रखा था। इसके बावजूद, INDIA गठबंधन सहित विपक्षी दलों का दावा है कि नामों को हटाना वोट चोरी के समान है, जिससे व्यवस्थित रूप से सत्तारूढ़ Bharatiya Janata Party को फायदा मिल रहा है।
नागरिक स्वतंत्रता के लिए अदालत के सख्त निर्देश
11 अक्टूबर को रविवार के विशेष सत्र के दौरान जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस V. Mohana की बेंच ने जरूरी याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने प्रदर्शनों के संबंध में कई विशिष्ट निर्देश जारी किए हैं:
- Section 163 BNSS के निषेधाज्ञा आदेशों वाले क्षेत्रों के बाहर शांतिपूर्वक इकट्ठा होने वाले लोगों की कोई अवैध हिरासत नहीं की जाएगी।
- मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, जब तक कि सार्वजनिक व्यवस्था के लिए संविधान के Article 19(2) के तहत प्रतिबंध उचित न हों।
- कानून के अनुसार इंटरनेट सेवाएं बिना किसी बाधा के चालू रहनी चाहिए।
- बैरिकेड्स की तुरंत समीक्षा की जाए ताकि यह सुनिश्चित हो कि वे केवल ट्रैफिक की जरूरत के हिसाब से हों और आवाजाही में बाधा न डालें।
- वकीलों और पत्रकारों के पेशेवर कर्तव्यों में कोई रुकावट नहीं डाली जाएगी।
- सुप्रीम कोर्ट परिसर के पास से Section 163 के नोटिस बोर्ड हटाए जाएं ताकि लोगों की न्याय तक पहुंच बनी रहे।
अदालत ने मंगलवार तक केंद्र सरकार से औपचारिक जवाब मांगा है। सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने बेंच को भरोसा दिलाया कि अधिकांश हिरासत में लिए गए लोगों को पहले ही रिहा कर दिया गया है और परिवहन सेवाओं को सामान्य किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और राजनीतिक हलचल
10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए जुटे थे। दिल्ली पुलिस ने भारी सुरक्षा बल तैनात किया था और कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए थे, जिसके कारण 3,000 से 7,000 लोगों की हिरासत की खबरें आईं। इन ऑपरेशनों के दौरान कई इन्फ्लुएंसर्स और विपक्षी नेताओं को भी पकड़ा गया था।
Cockroach Janta Party के संस्थापक Abhijeet Dipke को उनके सहयोगियों Saurav Das और Ashutosh Ranka के साथ 10 अक्टूबर को एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली छावनी के एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने 11 अक्टूबर को उन्हें रिहा करने का आदेश दिया, जिसके बाद उन्होंने 50,000 रुपये का जमानत बॉन्ड भरा। इन नेताओं ने अपनी आजादी पाने के लिए एक साल तक शांति बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की घोषणा की है। उनका इरादा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और रिविजन प्रक्रिया को निलंबित करने का एक ज्ञापन सौंपना है।
चीफ जस्टिस Surya Kant ने औपचारिक बैठक के अनुरोध को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि ये मुद्दे अभी विचाराधीन (sub judice) हैं और इन्हें उचित न्यायिक याचिकाओं के माध्यम से ही संबोधित किया जाना चाहिए। अब अधिकारियों पर मंगलवार तक की फाइलिंग में सुरक्षा प्रतिबंधों को सही ठहराने का दबाव है। विपक्ष 12 अक्टूबर को अपने निर्धारित मार्च के साथ आगे बढ़ने की योजना बना रहा है, जिससे वोटर लिस्ट का विवाद राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। अन्य क्षेत्रों में रिविजन प्रक्रिया जारी रहने के कारण चुनाव आयोग की और अधिक न्यायिक जांच होने की उम्मीद है।









