दो बार के पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद धर्मेंद्र काश्यप ने समाजवादी पार्टी (SP) का दामन थाम लिया है। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले यह बड़ा कदम उठाया है।
धर्मेंद्र काश्यप ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस बैठक के बाद उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी।
काश्यप के पार्टी बदलने को भाजपा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। खासकर रोहिलखंड क्षेत्र में उनका काफी प्रभाव है क्योंकि वे काश्यप समुदाय के एक प्रमुख नेता माने जाते हैं।
भाजपा से अलग होने के कारण और नाराजगी
धर्मेंद्र काश्यप पिछले कुछ समय से भाजपा की कार्यप्रणाली से काफी निराश चल रहे थे। इसी वजह से उन्होंने 7 अक्टूबर 2026 को औपचारिक रूप से भाजपा छोड़ने की घोषणा कर दी थी।
उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार की सूची से बाहर रखा गया था। इसके अलावा उन्होंने कानून व्यवस्था, बुलडोजर राजनीति, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर पार्टी के कामकाज पर सवाल उठाए।
काश्यप ने धार्मिक राजनीति पर पार्टी के फोकस की भी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपने आत्मसम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।
समाजवादी पार्टी में शामिल होने की प्रक्रिया
पार्टी बदलने की चर्चा पूरे हफ्ते बनी हुई थी। 8 और 9 अक्टूबर 2026 को धर्मेंद्र काश्यप समाजवादी पार्टी के नेता अनीस बेग के जन्मदिन समारोह में शामिल हुए और वहां वरिष्ठ सपा नेताओं के साथ मंच साझा किया।
उनके सोशल मीडिया अकाउंट से भी संकेत मिलने लगे थे। उन्होंने एक ‘tata bye-bye’ पोस्ट साझा किया था, जिससे उनके भाजपा छोड़ने की पुष्टि हो गई थी।
अंततः 11 अक्टूबर 2026 को यह पूरी तरह साफ हो गया कि वह अब ‘टीम अखिलेश’ का हिस्सा बन चुके हैं।
2027 विधानसभा चुनाव की नई रणनीति
धर्मेंद्र काश्यप ने समाजवादी पार्टी के ढांचे के भीतर अपनी चुनावी रणनीति की शुरुआत कर दी है। उन्होंने अपनी नई योजना के बारे में विस्तार से बताया है।
काश्यप ने 7 अक्टूबर को यह घोषणा की थी कि उनकी बेटी 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। यह कदम उनके नए राजनीतिक सफर और चुनावी रणनीति का हिस्सा है।









