दिल्ली प्रशासन ने शनिवार 10 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले एक अनधिकृत प्रदर्शन को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर निवारक हिरासत की कार्रवाई की। इस विरोध प्रदर्शन के लिए कॉकरोच जनता पार्टी के लोग इकट्ठा हुए थे।
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि चुनाव नामावली के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) में कथित अनियमितताओं के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त अपना इस्तीफा दें। पुलिस अधिकारियों ने राजधानी की सुरक्षा कड़ी कर दी थी ताकि जंतर मंतर पर होने वाले इस प्रदर्शन को रोका जा सके।
प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने लगभग 45 मेट्रो स्टेशनों पर सेवाओं को प्रतिबंधित कर दिया था। इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, NDTV, BBC, अल जजीरा और लाइव लॉ की रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोकने के लिए कदम उठाए क्योंकि आयोजकों के पास औपचारिक अनुमति नहीं थी।
नेताओं और प्रभावकों की गिरफ्तारी
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके और सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्हें मुंबई से एयर इंडिया की फ्लाइट से सुबह लगभग 10:20 बजे दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिया गया था।
अभिजीत डिपके ने अपने फोन से एक वीडियो बनाया था जिसमें कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा उन्हें हिरासत में लिए जाने का पल कैद हुआ है। इसके अलावा, अधिकारियों ने गुरुग्राम स्थित उनके निवास से इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया।
सुरक्षा इंतजाम और राजनीतिक असर
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कानून व्यवस्था की चिंताओं और विरोध प्रदर्शन के आवेदन में प्रक्रियात्मक कमियों के कारण ये कार्रवाई की गई। पूरे दिन के दौरान हजारों लोगों को निवारक हिरासत में लिया गया।
विभिन्न समाचार माध्यमों द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 2,000 से 7,000 के बीच बताई जा रही है। शहर में प्रदर्शनों में शामिल होने की कोशिश कर रहे कई हाई-प्रोफाइल विपक्षी नेता भी पुलिस की गिरफ्त में आए।
- ममता बनर्जी को साउथ एवेन्यू के पास से पकड़ा गया।
- अरविंद केजरीवाल को उनके आवास के पास से हिरासत में लिया गया।
- पिनाराई विजयन को केरल हाउस के पास से पकड़ा गया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि विरोध आंदोलनों के कारण शहर को बंधक नहीं बनाया जा सकता। इससे पहले 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मामलों की सुनवाई की थी और आनुपातिकता के सिद्धांत के तहत परिवहन के पूर्ण शटडाउन के खिलाफ चेतावनी दी थी।
जजों ने निर्देश दिया था कि अधिकारियों को सार्वजनिक आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय विनियमित संचालन सुनिश्चित करना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाया गया था।
वोटर लिस्ट विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद की जड़ भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया है। विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है। कुछ रिपोर्टों में कई राज्यों में लगभग 13 करोड़ नामों को हटाए जाने का जिक्र किया गया है।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया डुप्लिकेट, मृत व्यक्तियों और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के लिए जरूरी है ताकि चुनाव नामावली की सटीकता बनी रहे। हालांकि, स्वतंत्र जांचों में चुनाव आयुक्तों के बीच इस कार्यप्रणाली को लेकर आंतरिक मतभेद सामने आए हैं।
INDIA गठबंधन ने पहले ही संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया था। गठबंधन ने योग्य नागरिकों को मताधिकार से वंचित होने से बचाने के लिए पुराने वोटर रोल का उपयोग करने की मांग की थी। वहीं, भाजपा नेताओं ने इन विरोध प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अस्थिर करने की कोशिश बताया है।
हिरासत से रिहाई और वर्तमान स्थिति
कार्यकारी मजिस्ट्रेटों ने शनिवार और रविवार सुबह तक हिरासत में लिए गए लोगों की कागजी कार्रवाई पूरी की। निवारक अभियान समाप्त होने के बाद रविवार सुबह तक अधिकांश लोगों को रिहा कर दिया गया।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को 11 अक्टूबर की सुबह दिल्ली कैंट में एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और उसके बाद उन्हें हिरासत से रिहा कर दिया गया। रविवार सुबह तक शहर में मेट्रो का सामान्य संचालन फिर से शुरू हो गया।
कॉकरोच जनता पार्टी ने घोषणा की है कि वे तब तक लामबंदी के प्रयास जारी रखेंगे जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते। आने वाले हफ्तों में राज्य और प्रदर्शन आयोजकों के बीच का तालमेल न्यायिक सुनवाई और संभावित भविष्य की याचिकाओं पर निर्भर करेगा।









