नई दिल्ली के यशोभूमि में 10 अक्टूबर को दसवें इंडिया मोबाइल कांग्रेस का समापन हो गया। इस आयोजन ने देश के डिजिटल परिदृश्य में पिछले एक दशक में आए बड़े बदलावों को सबके सामने रखा। इस मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi और संचार मंत्री Jyotiraditya Scindia ने देश की डिजिटल प्रगति की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि साल 2014 में एक गीगाबाइट मोबाइल डेटा की कीमत 268 रुपये थी, जो अब घटकर लगभग 8 रुपये रह गई है। डेटा की कीमतों में आई इस भारी कमी की वजह से मोबाइल डेटा के इस्तेमाल में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। औसत मासिक उपयोग जो पहले केवल 0.26 गीगाबाइट था, वह अब बढ़कर 36 गीगाबाइट से अधिक हो गया है।
Ministry of Communications द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, ब्रॉडबैंड कनेक्शनों की संख्या में भी बड़ा उछाल आया है। ये कनेक्शन 60 मिलियन से बढ़कर अब एक अरब से ज्यादा हो चुके हैं। इस आयोजन का संचालन Department of Telecommunications और Cellular Operators Association of India ने मिलकर किया, जिससे यह एशिया का सबसे बड़ा ऐसा मंच बन गया है।
डिजिटल विस्तार और 6G की ओर बढ़ते कदम
इस बार का आयोजन 7 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक चला और इसकी थीम Scale Without Boundaries रखी गई थी। इस कार्यक्रम में 100 से ज्यादा देशों के लगभग 1.5 लाख लोग शामिल हुए। दूरसंचार क्षेत्र के भविष्य के लिए अब 6G और AI Frontier पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें घरेलू नवाचार और वैश्विक नेतृत्व को प्राथमिकता दी गई है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संबोधन में बताया कि भारत ने अब तक 5.5 लाख 5G बेस स्टेशन लगा दिए हैं। इससे देश के हर जिले में 5G की कवरेज सुनिश्चित हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि 2022 के कांग्रेस में 5G सेवाओं की शुरुआत के बाद से मोबाइल इंटरनेट की स्पीड दस गुना बढ़ गई है।
अब सरकार और उद्योग जगत का ध्यान 6G तकनीक पर है, जिसके लिए मुख्य कांग्रेस के साथ-साथ International Bharat 6G Symposium का आयोजन भी किया गया। मंत्री Jyotiraditya Scindia ने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक 6G पेटेंट का 10 प्रतिशत हिस्सा हासिल करना चाहता है। इसके लिए भारत अब केवल वैश्विक मानकों को अपनाने के बजाय अपनी बौद्धिक संपदा के जरिए योगदान देने की रणनीति पर काम कर रहा है।
प्रमुख हितधारक और भविष्य के लक्ष्य
इस डिजिटल बदलाव में Department of Telecommunications के साथ Reliance Jio और Bharti Airtel जैसी बड़ी टेलिकॉम कंपनियां और कई भारतीय स्टार्टअप्स शामिल हैं। ये सभी संस्थान अब 5G Standalone नेटवर्क से AI-native 6G इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की सफलता के लिए ग्रामीण इलाकों में सेवा की गुणवत्ता और स्वदेशी कोर टेक्नोलॉजी सबसे महत्वपूर्ण मानक होंगे।
सरकार ने साल 2030 तक एक अरब 5G यूजर्स का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए Bharat 6G Alliance के माध्यम से कई व्हाइट पेपर और समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के लिए भी एक ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे Starlink, Jio Satcom और OneWeb जैसे प्रदाताओं के प्रवेश का रास्ता साफ होगा।
इस डिजिटल माहौल से अलग-अलग वर्गों को लाभ मिल रहा है:
- आम उपभोक्ताओं को कम कीमत पर ज्यादा डेटा मिल रहा है।
- किसानों और छोटे व्यापारियों को AI आधारित सलाह और डिजिटल पेमेंट सिस्टम मिल रहे हैं।
- Ericsson जैसी कंपनियों द्वारा एंटीना जैसे पुर्जों के घरेलू निर्माण से निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है।
चुनौतियां और आगामी योजनाएं
डिजिटल प्रगति के बावजूद कुछ बुनियादी और नियामक समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। सैटेलाइट सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की कीमत, 6G रिसर्च के लिए भारी पूंजी की जरूरत और ग्रामीण क्षेत्रों में सर्विस की क्वालिटी बनाए रखना चर्चा के मुख्य विषय रहे। उम्मीद है कि Department of Telecommunications और Telecom Regulatory Authority of India जल्द ही सैटेलाइट स्पेक्ट्रम फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दे देंगे।
टेलिकॉम ऑपरेटर्स अब अपने 5G Standalone विस्तार को जारी रखेंगे और साथ ही pre-6G फीचर्स की टेस्टिंग भी करेंगे। कांग्रेस के आखिरी दिन रोबोटिक्स और खेती-किसानी में नए उपयोग के तरीके दिखाए गए, जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए अगले व्यावहारिक परीक्षण होंगे। इन सभी जानकारियों और बयानों को Moneycontrol, Businessworld, Communications Today और Times Now Navbharat जैसे स्वतंत्र माध्यमों ने भी कवर किया है।









