शाहजहांपुर जिले और जलालाबाद जैसे छोटे कस्बों में चल रहे एक्स-रे केंद्र Atomic Energy Regulatory Board (AERB) के सुरक्षा मानकों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। इन केंद्रों में रेडिएशन सुरक्षा के नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
आरोप है कि ये केंद्र बहुत ही छोटे और घटिया कमरों में चलाए जा रहे हैं। यहाँ रेडिएशन को रोकने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे मरीजों और आस-पास के लोगों की सेहत को गंभीर खतरा है।
सुरक्षा मानकों और बुनियादी ढांचे में बड़ी कमी
AERB के नियमों के मुताबिक, एक्स-रे रूम की दीवारें नौ इंच की ठोस ईंटों की होनी चाहिए या उनमें लेड लाइनिंग लगी होनी चाहिए। साथ ही, कमरे का कुल क्षेत्रफल कम से कम 18 वर्ग मीटर होना अनिवार्य है।
स्थानीय केंद्रों में इन नियमों की अनदेखी की जा रही है और वे बहुत तंग कमरों में चल रहे हैं। यहाँ उचित शील्डिंग नहीं है, जिससे रेडिएशन बाहर निकल रहा है। इसका असर न केवल मरीजों पर, बल्कि पास के गलियारों और पड़ोस की संपत्तियों में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।
सुरक्षा उपकरणों और चेतावनी लाइटों का अभाव
इन केंद्रों पर काम करने वाले तकनीशियन अक्सर जरूरी सुरक्षा गियर के बिना काम करते देखे जाते हैं। वे लेड एप्रन, थायराइड शील्ड और TLD बैज का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, जो रेडिएशन के प्रभाव की निगरानी के लिए जरूरी होते हैं।
एक्स-रे मशीन चलते समय बाहर जलने वाली लाल चेतावनी लाइटें या तो खराब हैं या बिजली बचाने के लिए बंद रखी जाती हैं। इस लापरवाही के कारण मरीज अनजाने में कमरे के अंदर चले जाते हैं, जबकि उस समय रेडिएशन निकल रहा होता है।
स्वास्थ्य जोखिम और अवैध संचालन
मेडिकल एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि बिना शील्डिंग वाली आयनकारी रेडिएशन से डीएनए म्यूटेशन, कैंसर, मोतियाबिंद और त्वचा की विभिन्न बीमारियां हो सकती हैं। यह रेडिएशन गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए एक “साइलेंट पॉइजन” की तरह खतरा पैदा करता है।
निगरानी की कमी के कारण कई लोग किराए की जगहों पर बिना किसी वेरिफिकेशन के मशीनें लगा रहे हैं। वे अनिवार्य eLORA पोर्टल की मंजूरी और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को पूरी तरह बाईपास कर रहे हैं।
अधिकारियों से जांच की मांग
धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने औपचारिक रूप से अधिकारियों से मांग की है कि जलालाबाद कस्बे में चल रही इन अवैध एक्स-रे दुकानों की जांच की जाए।
जन स्वास्थ्य समर्थकों ने सवाल उठाए हैं कि क्या शाहजहांपुर स्वास्थ्य विभाग और AERB के अधिकारी किसी बड़ी रेडिएशन दुर्घटना के होने से पहले इन खतरनाक तरीकों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेंगे।









