औनला से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र काश्यप ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से अलग होने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे अंदरूनी अनदेखी और घुटन महसूस करने की बात कही है।
धर्मेंद्र काश्यप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी हटा दी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि जिन्होंने उनकी चुनावी हार सुनिश्चित करने के लिए काम किया, पार्टी नेतृत्व अब उन्हीं लोगों को सम्मानित कर रहा है।
कानून व्यवस्था और सामाजिक न्याय पर उठाए सवाल
एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान धर्मेंद्र काश्यप ने राज्य की कानून व्यवस्था की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि सवर्णों, पिछड़ों और दलितों के लिए कानूनी मानक अलग-अलग क्यों दिख रहे हैं।
उनका कहना है कि समाज के हर वर्ग को समान न्याय और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय की प्रक्रिया में किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
राजनीति में धर्म के इस्तेमाल और बुनियादी मुद्दों पर चर्चा
काश्यप ने धर्म को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की निंदा की। उन्होंने तर्क दिया कि शासन को धार्मिक दिखावे के बजाय बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने शासन के लिए निम्नलिखित बुनियादी जरूरतों को जरूरी बताया:
- भोजन और कपड़ा
- मकान और आवास
- मानवीय गरिमा
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि एक तरफ स्कूल बंद किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नई शराब की दुकानें खोली जा रही हैं।
2027 चुनाव और भविष्य की रणनीति
धर्मेंद्र काश्यप ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव आने वाला है। उन्होंने अपनी भविष्य की योजना के बारे में विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा कि वह अपने अगले राजनीतिक कदम का फैसला करने से पहले एक पंचायत में अपने समर्थकों से सलाह करेंगे। उन्होंने अभी तक यह संकेत नहीं दिया है कि वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होंगे या नहीं। उनके इस फैसले के बाद शाहजहांपुर में बड़ी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।

























