भारतीय जनता पार्टी (BJP) छोड़ने वाले एक पूर्व सांसद को उनके हालिया फैसले के बाद तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस व्यक्ति ने 10 साल तक सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।
उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पार्टी से तीन बार चुनाव टिकट लिया था। ‘मोदी मैजिक’ के दौर में उन्होंने दो बार जीत हासिल की थी।
पूर्व सांसद ने उस समय संगठन छोड़ा जब उन्हें एक पिछड़े वर्ग के समाजवादी पार्टी उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था।
राज्यसभा सीट और पिछड़ा वर्ग का मुद्दा
जानकारों का कहना है कि पूर्व सांसद ने पार्टी के भीतर राज्यसभा नामांकन की कोशिश की थी। जब उन्हें वह सीट नहीं मिली, तो उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे के बाद उन्होंने BJP पर आरोप लगाया कि पार्टी पिछड़े वर्ग के सदस्यों को किनारे कर रही है। आलोचकों का तर्क है कि उनके ये दावे पूरी तरह विरोधाभासी हैं।
उनका कहना है कि देश के प्रधानमंत्री खुद एक पिछड़े वर्ग से आते हैं और वे नेतृत्व के सर्वोच्च स्तर पर हैं। ऐसे में पिछड़ों की अनदेखी का आरोप लगाना गलत है।
निजी स्वार्थ और नई पार्टी की तलाश
पूर्व सांसद पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सामाजिक न्याय के बजाय अपने निजी हितों को प्राथमिकता दी है। यह दावा किया जा रहा है कि उनका मुख्य लक्ष्य किसी भी पार्टी के साथ जुड़कर केवल विधायी सीट हासिल करना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह अब समाजवादी पार्टी से टिकट की तलाश में हैं। वह विशेष रूप से बिथरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते हैं।
उनके राजनीतिक इरादों को लेकर यह भी बात सामने आई है कि यदि समाजवादी पार्टी में उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो वह बहुजन समाज पार्टी का दरवाजा खटखटाएंगे।

























