Skip to main content

Naradsamvad

यूपी के अस्पतालों में दवाओं की कीमतों में भारी अंतर, FSDA की जांच में खुला बड़ा खेल

Naradsamvad
Naradsamvad - Narad news Agency
4 Min Read

उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FSDA) द्वारा की गई एक विस्तृत जांच में अस्पताल फार्मेसियों के भीतर दवाओं की कीमतों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि एक ही ब्रांड की दवा के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में 27,390 रुपये तक का अंतर है।

Ad image

यह अध्ययन 5 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 के बीच 214 अस्पतालों से इकट्ठा किए गए आंकड़ों के विश्लेषण के बाद किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में जांचकर्ताओं ने 167 अलग-अलग दवाओं की कीमतों में विसंगतियां पाई हैं।

दवाओं और मेडिकल उपकरणों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

जांच के दौरान कई गंभीर मामले सामने आए हैं। एक उदाहरण में पाया गया कि फंगल इन्फेक्शन का इंजेक्शन (Caspofungin 70mg), जिसे 800 रुपये में खरीदा गया था, उसे 21,230 रुपये के MRP पर बेचा गया। यह कीमत में 26.5 गुना की भारी वृद्धि है।

ALSO READ  बाराबंकी के लोधेश्वर महादेवा में दशहरा उत्सव, रावण का पुतला फूंका गया

एक अन्य चरम मामले में Polymyxin-B इंजेक्शन की बात सामने आई है। इसे 74.09 रुपये में खरीदा गया था, लेकिन इसका MRP लगभग 4,981 रुपये था, जो कि खरीद मूल्य से 67 गुना ज्यादा है। मेडिकल उपकरणों में भी ऐसा ही रुझान देखा गया, जहाँ एक थ्री-वे स्टॉपकॉक 6.40 रुपये में खरीदा गया लेकिन उसका MRP 163 रुपये था।

विशिष्ट दवाओं की बात करें तो Pfizer की दवा Inotuzumab Ozogamicin 1mg (Besponsa) में 27,390 रुपये का मूल्य अंतर देखा गया। इस विश्लेषण में Reliance Life Sciences, Juventas और Lupin जैसी कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं।

नियमों की अनदेखी और बाजार की मांग का दबाव

FSDA के अधिकारियों ने इन निष्कर्षों को उपभोक्ता मूल्य निर्धारण में एक गंभीर अनियमितता बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि सालाना मूल्य संशोधन की अनुमति 10 प्रतिशत की सीमा के भीतर है, लेकिन वर्तमान अंतर यह बताते हैं कि कीमतें मानक नियमों के बजाय बाजार की मांग और खरीदार की मजबूरी से तय हो रही हैं।

ALSO READ  बलिया: स्कूल की छत से लौकी तोड़ने गया छात्र की हाई-टेंशन तार की चपेट में आने से मौत

ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क (AIDAN) की सह-संयोजक डॉ. मीरा शिवा ने इस मुद्दे पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि फार्मास्युटिकल बाजार का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा प्रभावी मूल्य नियंत्रण से बाहर है, जिसका फायदा अस्पताल निगरानी की कमी के कारण उठा रहे हैं।

पारदर्शिता के लिए केंद्र सरकार से अपील और नई कार्रवाई

इन खुलासों के बाद यूपी FSDA ने केंद्र सरकार और नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) से अधिक पारदर्शिता लागू करने का आग्रह किया है। विभाग अब अस्पताल फार्मेसी की कीमतों की तुलना बाहरी खुदरा दरों से कर रहा है।

ALSO READ  खुरजा के अब्दानगर इलाके के नाले में मिला अज्ञात व्यक्ति का शव, जांच में जुटी पुलिस

इस दिशा में की गई कार्रवाई के तहत वाराणसी के BHU और निजी अस्पतालों से गुणवत्ता परीक्षण के लिए 50 दवाओं के नमूने लिए गए हैं। इसी तरह के परिणाम कर्नाटक FSDA द्वारा भी बताए गए थे, जहाँ 256 मेडिकल उत्पादों की खरीद कीमतों और MRP के बीच 10 से 52 गुना तक का अंतर देखा गया था।

अब अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अस्पतालों के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि वे रोगी के बिल पर खरीद लागत और MRP दोनों को प्रदर्शित करें। यह कदम ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के तहत जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Search
अपना ज़िला चुनें
error: Content is protected !!