यूपी हेड अनुराग मिश्रा।
डिप्टी आर एम ओ लखीमपुर को Igrs शिकायत का फर्जी निस्तारण करना पड़ा मंहगा
लखीमपुर खीरी / लखनऊ:लखीमपुर खीरी जिले के सरकारी क्रय केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीद में बड़े पैमाने पर धांधली, बिचौलियों की सांठगांठ और भू-अभिलेखों (खतौनी) में हेरफेर करके करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर शाहजहांपुर निवासी पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता अनुराग मिश्रा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका दायर की है।
फर्जी किसानों के नाम पर बेची गई हजारों क्विंटल उपज
याचिका में सबूत सहित आरोप लगाया गया है कि जिले के विभिन्न मंडी क्रय केंद्रों पर असली किसानों की जमीनों (खाता संख्या) और किसान पंजीकरण विवरण का दुरुपयोग कर फर्जी लोगों के नाम पर धान बेचा गया।
याचिका में निम्नलिखित प्रमुख फर्जी खरीद के मामलों को उजागर किया गया है
बलजीत कौर: लखीमपुर मंडी V क्रय केंद्र पर 23 दिसंबर को 190 क्विंटल धान बेचा दर्ज किया गया। विभाग ने खता संख्या 2764, 2619 आदि का स्वामी बताया, जबकि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार वास्तविक भू-स्वामी सुंदर लाल, मेवा लाल आदि हैं।
छवि गुप्ता: लखीमपुर मंडी VII क्रय केंद्र पर 20 दिसंबर 2025 को 187 क्विंटल धान बेचा गया। खता संख्या 00426 आदि का इस्तेमाल किया गया, जिसके असली मालिक नूर मोहम्मद, रोज़दार खान आदि हैं।
अमित कुमार: लखीमपुर मंडी II केंद्र पर 20 दिसंबर को 164 क्विंटल धान की फर्जी खरीद दिखाई गई।
हरीश कुमार मिश्रा एवं मनोज कुमार आर्य: लखीमपुर मंडी IV एवं VI केंद्रों पर क्रमश: 214 क्विंटल (25 दिसंबर) और 100 क्विंटल (10 जनवरी) धान की खरीद दर्ज की गई।
आलोक गौर एवं अंतराम: लखीमपुर मंडी III (232 क्विंटल) तथा मंडी IX (273 क्विंटल) पर धान की फर्जी बिक्री दर्ज की गई। इनके द्वारा इस्तेमाल की गई खतौनियों (जैसे खता संख्या 00261, 01344, 01072 आदि) के वास्तविक मालिक अयोध्या, छोटा, ललित मोहन आदि किसान हैं।
माजिद अली एवं प्रज्ञा गुप्ता: लखीमपुर मंडी I पर 190 क्विंटल और मंडी VIII पर 192 क्विंटल धान की अवैध बिक्री दर्ज हुई, जिसमें धोखे से वास्तविक किसानों (अंबरीश, इदरीश, निर्मला देवी आदि) के खाता नंबरों का इस्तेमाल किया गया।
प्रशासनिक उपेक्षा और लीपापोती का आरोप
याचिकाकर्ता ने बताया कि इस संबंध में जिला अधिकारी (DM) लखीमपुर खीरी और मुख्यमंत्री कार्यालय को 07 मार्च 2026, 12 मार्च 2026 तथा 08 अप्रैल 2026 को लिखित शिकायतें और साक्ष्य भेजे गए थे। हालांकि, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी (RMO) कार्यालय द्वारा दी गई जांच रिपोर्टों में गलत डेटाबेस के आधार पर शिकायतों को खारिज या फर्जीवाड़े को जायज ठहराने का प्रयास किया गया।
हाईकोर्ट से की गई प्रमुख मांगें
अधिवक्ता अवधेश चंद्र द्विवेदी और सौरभ कुमार मिश्रा के माध्यम से दायर इस याचिका में अदालत से निम्नलिखित निर्देश जारी करने की प्रार्थना की गई है:
पारदर्शी खरीद: लखीमपुर खीरी के क्रय केंद्रों पर पारदर्शी और तत्काल खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
निष्पक्ष जांच: फर्जीवाड़े की जांच किसी स्वतंत्र और सक्षम एजेंसी से समयबद्ध तरीके से कराई जाए।
रिकवरी और कार्रवाई: सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने वाले बिचौलियों, फर्जी किसानों और संलिप्त अधिकारियों को चिन्हित कर उनसे राशि की वसूली की जाए तथा दंडात्मक कार्रवाई हो।









