केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने बुधवार को लखनऊ में एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
चिराग पासवान 7 अक्टूबर, 2026 को लखनऊ पहुंचे थे। यहां उनके समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। वह अपने पिता और पार्टी के संस्थापक राम विलास पासवान की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ आए थे, जो 8 अक्टूबर, 2026 को मनाई जाएगी।
मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लखनऊ में आयोजित होने वाला यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि शहर में पहली बार इस कार्यक्रम को इतने बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है।
पार्टी की चुनावी तैयारी और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा
चिराग पासवान ने जोर देकर कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश से पार्टी कार्यकर्ता राज्य की राजधानी लखनऊ में इकट्ठा होंगे। कार्यकर्ता दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देंगे और चुनावी मैदान में औपचारिक रूप से उतरने से पहले उनका आशीर्वाद लेंगे।
पार्टी का लक्ष्य इस आयोजन के जरिए अपनी सांगठनिक शक्ति को बढ़ाना है। सभी 403 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए तैयारी कर पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
गठबंधन और राजनीतिक रणनीति पर स्पष्टता
राज्य में संभावित राजनीतिक गठबंधन के सवाल पर चिराग पासवान ने अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि LJP-RV केंद्र स्तर पर और बिहार में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के साथ गठबंधन बनाए हुए है।
हालांकि, उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन का स्वरूप अभी तय नहीं है। उन्होंने यह भी नोट किया कि वर्तमान में उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में NDA का हिस्सा नहीं है और वह स्वतंत्र रूप से अपनी ताकत बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
शक्ति प्रदर्शन और प्रमुख नेताओं को निमंत्रण
राजनीतिक विश्लेषक 8 अक्टूबर के इस कार्यक्रम को एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि यह आयोजन 2027 के चुनावों से पहले पार्टी की महत्वाकांक्षाओं का संकेत देने के लिए किया जा रहा है।
पार्टी के दायरे को बढ़ाने के लिए चिराग पासवान ने राज्य के कई प्रमुख नेताओं को निमंत्रण भेजा है, जिनमें शामिल हैं:
- मुख्यमंत्री Yogi Adityanath
- पूर्व मुख्यमंत्री Mayawati
- समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav
LJP-RV रणनीतिक रूप से दलित और ब्राह्मण मतदाताओं के समर्थन को एकजुट करने का लक्ष्य रख रही है। पार्टी विशेष रूप से राज्य के दलित मतदाता आधार के भीतर उभर रही बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का लाभ उठाना चाहती है।









