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Naradsamvad

भाजपा जिला कार्यकारिणी घोषित होते ही शोशल मीडिया पर मचा बवाल, कई जगह खुशी तो कई जगह खुला असंतोष

Vivek Shukla
3 Min Read

रिपोर्ट/अंजनी अवस्थी

आयातित नेताओं को अहम जिम्मेदारी, मूल कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर उठे सवाल

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रामनगर बाराबंकी। लंबे इंतजार और मंथन के बाद रविवार रात भाजपा की जिला कार्यकारिणी घोषित होते ही जिले की सियासत गर्मा गई। सूची सामने आते ही जहां कुछ कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया, वहीं बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर असंतोष जताना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष रोहित सिंह के इस्तीफे को लेकर रही। उन्हें जिला सोशल मीडिया संयोजक बनाए जाने के बाद उन्होंने मंगलवार को ही पद से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट के जरिए जिलाध्यक्ष राम सिंह भूलन वर्मा और मंत्री सतीश चंद्र शर्मा को संबोधित करते हुए नाराजगी जाहिर की।नई कार्यकारिणी में कई पुराने चेहरों को सीमित भूमिका मिलने से भी असंतोष बढ़ा है। पूर्व महामंत्री शील रत्न मिहिर को उपाध्यक्ष पद दिया गया, जबकि शेखर हयारन अपना पद बचाने में सफल रहे। वहीं पूर्व जिला उपाध्यक्ष प्रमोद तिवारी को बाहर का रास्ता दिखाए जाने की चर्चा भी जोरों पर है।सोशल मीडिया पर यह मुद्दा भी गरम है कि पूर्व में अन्य दलों से आए नेताओं को महामंत्री और उपाध्यक्ष जैसे अहम पदों पर जगह दी गई है, जबकि लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया। महिला कार्यकर्ताओं में अलका मिश्रा और रामेश्वरी त्रिवेदी जैसी सक्रिय चेहरों को मुख्य कार्यकारिणी में स्थान न मिलना भी सवालों के घेरे में है।नई कार्यकारिणी में दरियाबाद क्षेत्र के वर्चस्व को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। इसके पीछे मंत्री सतीश शर्मा की भूमिका बताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे क्षेत्रीय संतुलन के बजाय गुटीय प्रभाव का परिणाम माना जा रहा है।जिलाध्यक्ष बनने के बाद राम सिंह भूलन वर्मा से कार्यकर्ताओं को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन नई टीम के गठन के बाद उन्हीं कार्यकर्ताओं में निराशा साफ झलक रही है। उनके नेतृत्व शैली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।आगामी पंचायत और 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह असंतोष पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि पार्टी के जिम्मेदार इसे आंतरिक मामला बताकर जल्द सुलझाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है, जो भविष्य में पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

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