उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जिला मजिस्ट्रेट (DM) उमेश प्रताप सिंह और डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव वकील रामेंद्र सिंह के बीच तीखी बहस हुई है। इस घटना के बाद बिजनौर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है।
यह मामला 4 नवंबर, 2026 का है, जब वकील रामेंद्र सिंह अपने क्लाइंट की ओर से एक मृतक के आश्रित से जुड़े मामले पर चर्चा करने डीएम कार्यालय पहुंचे थे। वकील के मुताबिक, उन्होंने ऑफिस स्टाफ को अपना विजिटिंग कार्ड दिया, लेकिन उन्हें बताया गया कि डीएम ऑफिस में ऐसे कार्ड मान्य नहीं होते हैं। लाइन में इंतजार करने के बाद जब वह अंदर गए, तो वकील का आरोप है कि डीएम उमेश प्रताप सिंह ने उनके साथ बदसलूकी की और बातचीत का वीडियो बनाने की कोशिश की। रामेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि डीएम ने टिप्पणी की कि वकीलों को उनके ऑफिस नहीं आना चाहिए।
पुलिस और वकीलों के बीच झड़प
इस विवाद के बाद बड़ी संख्या में वकील डीएम कार्यालय के बाहर इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच झड़प हो गई, जिसमें ऑफिस के प्रवेश द्वार का एक कांच का पैनल टूट गया।
प्रदर्शनकारी वकीलों ने निम्नलिखित मांगें रखीं:
- जिला मजिस्ट्रेट का तुरंत तबादला किया जाए।
- तबादले की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
स्थिती को संभालने के लिए एसपी (SP) कृष्ण कुमार बिश्नोई मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिया कि डीएम के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी। बातचीत के बाद डीएम उमेश प्रताप सिंह ने इस घटना को एक गलतफहमी बताया, जिसे अब सुलझा लिया गया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष समेत पांच वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से चर्चा की, जिसके बाद अधिकारियों ने स्थिति सामान्य होने की रिपोर्ट दी।
यह घटना डीएम की हालिया जांच के बीच हुई है, क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारंपरिक मेले के प्रबंधन को लेकर बिजनौर डीएम द्वारा जारी एक आदेश को निलंबित कर दिया था। उस मामले में कोर्ट ने अधिकारी को ‘प्लैनिपोटेंटियरी’ (पूर्ण अधिकार संपन्न) की तरह व्यवहार न करने की चेतावनी दी थी।









