गोंडा पुलिस ने अयोध्या की यात्रा के लिए परिवार से 10,000 रुपये ठगने के उद्देश्य से फर्जी अपहरण की साजिश रचने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए लोगों में कथित पीड़ित युवक भी शामिल है। खोडारे थाना पुलिस टीम ने इस अपराध में इस्तेमाल किए गए तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
यह मामला 27 अक्टूबर 2026 की शाम को शुरू हुआ, जब सुनील राजभर ने डायल-112 आपातकालीन सेवा को अपने भाई शिवम राजभर के लापता होने की सूचना दी। रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने सर्विलांस तकनीक की मदद से शिवम के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक की।
गन्ने के खेत से बरामद हुआ युवक
हेड कांस्टेबल चंद्रशेखर मौर्य के नेतृत्व में गन्ने के खेत में तलाशी अभियान चलाया गया, जिसके बाद शिवम मिल गया। शिवम को सीएचसी बभनजोट ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी सेहत सामान्य बताई। उसने शुरुआत में दावा किया कि विकास, विशाल और राज नाम के तीन परिचितों ने उसे बेहोशी की दवा का इंजेक्शन लगाया था।
हालांकि, शरीर पर चोट के निशान न होने और तकनीकी सबूतों के कारण पुलिस को संदेह हुआ। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण से पता चला कि परिवार में डर पैदा करने के लिए उन्हें फोटो, वॉयस मैसेज और मौत की धमकियां भेजी गई थीं।
शराब के नशे में रची थी साजिश
कड़ी पूछताछ के दौरान शिवम ने कबूल किया कि उसने शराब पीने के बाद अपने चचेरे भाई राहुल राजभर उर्फ सूरज (निवासी পিপरा इस्माइल) और अपने दोस्त मासूम रजा (निवासी जलालपुर खलंगवा) के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। इस समूह ने अयोध्या की यात्रा के लिए 10,000 रुपये वसूलने की योजना बनाई थी।
योजना के मुताबिक, शिवम गन्ने के खेत में छिपा रहा जबकि उसके साथियों ने फिरौती के संदेश भेजे। खोडारे पुलिस ने राहुल राजभर, मासूम रजा और शिवम राजभर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत के लिए अदालत में पेश किया है।









