NTPC भारत के अलग-अलग राज्यों में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए फिजिबिलिटी स्टडी यानी व्यवहार्यता अध्ययन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र की इस बिजली कंपनी द्वारा अपने नॉन फॉसिल फ्यूल यानी गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा पोर्टफोलियो को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विस्तार है।
यह पूरी योजना देश में बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने और क्लीन एनर्जी यानी स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु ऊर्जा में निवेश से एक स्थिर बेस लोड पावर सोर्स मिलेगा, जो सौर और पवन ऊर्जा जैसे बीच-बीच में रुकने वाले रिन्यूएबल एनर्जी विकल्पों का पूरक बनेगा।
परमाणु संयंत्रों के लिए स्थलों का चयन
कंपनी के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि शुरुआती आकलन में उन जगहों की पहचान करने पर ध्यान दिया जाएगा जो सख्त सुरक्षा और भूगर्भीय आवश्यकताओं को पूरा करते हों। संभावित प्लांट लोकेशन्स के लिए पानी की उपलब्धता और ग्रिड कनेक्टिविटी का मूल्यांकन किया जाएगा।
इन अध्ययनों के जरिए यह तय किया जाएगा कि अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में परमाणु रिएक्टर स्थापित करना तकनीकी और वित्तीय रूप से कितना व्यावहारिक है। तकनीकी विशेषज्ञ वर्तमान में क्षेत्रीय बिजली मांग के पैटर्न की समीक्षा कर रहे हैं ताकि उन स्थानों को प्राथमिकता दी जा सके जिन्हें परमाणु ऊर्जा के भरोसेमंद उत्पादन से सबसे अधिक लाभ होगा।
सुरक्षा मानक और नियामक नियम
परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान कई कड़े नियमों का पालन किया जाएगा। हर एक प्रोजेक्ट Atomic Energy Regulatory Board द्वारा निर्धारित नियामक मानकों के अनुसार होगा।
- फिजिबिलिटी स्टेज से आगे बढ़ने के लिए सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य शर्त है।
- पर्यावरण संबंधी नियमों का पूरी तरह पालन करना प्राथमिक प्राथमिकता रहेगी।
ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की योजनाएं
यह पहल पारंपरिक कोयला आधारित थर्मल पावर पर निर्भरता को कम करने की एक कोशिश है। देश की लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण करना जरूरी हो गया है। मैनेजमेंट ने कहा है कि प्रोजेक्ट के निष्पादन में कुशलता लाने के लिए कंपनी स्थापित परमाणु प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ सहयोग करेगी।
इन शुरुआती फिजिबिलिटी रिपोर्टों को पूरा करने के लिए अभी कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई है। स्टेकहोल्डर्स का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि परमाणु ऊर्जा औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में कितनी मददगार साबित होगी। कंपनी ने उम्मीद जताई है कि आने वाले महीनों में साइट मूल्यांकन चरण की प्रगति के साथ और अपडेट दिए जाएंगे।









