गृह मंत्रालय ने जनगणना नियमों 1990 में संशोधन किया है। इस बदलाव के बाद अब आगामी जनगणना 2027 के लिए प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों को भी गणनाकर्मी यानी एन्यूमेरेटर के रूप में काम करने की अनुमति मिल गई है।
भारत में पहली बार पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होने जा रही है। इसके लिए बड़ी संख्या में जनशक्ति की जरूरत है, जिसे पूरा करने के लिए यह नियामक बदलाव किया गया है। इससे पहले कानूनी चुनौतियों के कारण राज्यों द्वारा कर्मचारियों की मांग करने की कोशिशों पर रोक लग गई थी।
16 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक गजट अधिसूचना G.S.R. 896(E) जारी की गई। इस अधिसूचना के जरिए मौजूदा नियमों के नियम 3 में कुछ खास प्रविष्टियों को बदला गया है ताकि कर्मियों का दायरा बढ़ाया जा सके। ये नए दिशा-निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं क्योंकि सरकार गणना प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की तैयारी कर रही है।
सटीक डेटा संग्रह और कानूनी स्पष्टता
द टाइम्स ऑफ इंडिया, बिजनेस स्टैंडर्ड और द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य डेटा संग्रह को सटीक बनाना है। इसमें दूसरे चरण के दौरान जातिगत डेटा जैसी संवेदनशील जानकारियों को इकट्ठा करना शामिल है।
वर्कफोर्स का विस्तार इसलिए किया गया है ताकि उन देरी से बचा जा सके जो पहले हुई थीं। पहले केवल सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाने के आदेश दिए गए थे, जिसे हाईकोर्ट ने स्टे कर दिया था। अब निजी क्षेत्र के लोगों को शामिल करने से कानूनी स्पष्टता आई है और कोर्ट के हस्तक्षेप की समस्या दूर हो गई है।
गणनाकर्मियों के लिए निर्धारित योग्य श्रेणियां
संशोधित नियमों के तहत गणनाकर्मियों के चयन के लिए एक बड़ा दायरा तैयार किया गया है। अधिसूचना में उन समूहों को स्पष्ट किया गया है जिन्हें अब आधिकारिक तौर पर संभावित गणनाकर्मी माना जाएगा।
- सहायता प्राप्त निजी संस्थानों के शिक्षक
- गैर-सहायता प्राप्त निजी संस्थानों के शिक्षक
- सरकारी विभागों के क्लर्क
- पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स के क्लर्क
- बैंकों और निजी कंपनियों के क्लर्क
- राज्य अधिकारियों द्वारा तय किया गया कोई भी अन्य उपयुक्त व्यक्ति
अब राज्य सरकारों के पास यह अधिकार है कि वे स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इन विस्तारित श्रेणियों से व्यक्तियों की नियुक्ति करें। अधिकारियों का कहना है कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि संवेदनशील सवालों को संभालने वाले लोग उचित रूप से योग्य हों।
संस्थानों पर प्रभाव और डिजिटल प्रशिक्षण
इस विस्तार का निजी संस्थानों पर असर पड़ सकता है। जनगणना की अवधि के दौरान इन संस्थानों को अस्थाई रूप से स्टाफ की कमी का सामना करना पड़ सकता है। जिन शिक्षकों को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाएगी, वे रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के मार्गदर्शन में डिजिटल डेटा संग्रह की प्रक्रिया को संभालेंगे।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने नए गणनाकर्मियों की भर्ती की जाएगी। साथ ही यह भी तय नहीं है कि शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण स्कूल कैलेंडर में कैसे बदलाव किए जाएंगे। डिजिटल फ्रेमवर्क में उच्च स्तर की सटीकता की जरूरत है, इसलिए प्रशिक्षण सत्रों में संवेदनशील पूछताछ को संभालने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां जनसंख्या गणना का काम नवंबर से ही शुरू हो जाएगा। राज्य सरकारों से उम्मीद है कि वे जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दें ताकि यह विशाल अभियान समय पर पूरा हो सके।









