सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए Yes Bank, Reserve Bank of India और केंद्र सरकार की अपीलों को खारिज कर दिया है। अदालत ने मार्च 2020 में 8,415 करोड़ रुपये मूल्य के Additional Tier 1 (AT1) बॉन्ड्स को राइट ऑफ (खाते से हटाने) करने के निर्णय को पलट दिया है।
इस फैसले के बाद अब इन बॉन्ड्स को बैंक के बैलेंस शीट में दोबारा लायबिलिटी के तौर पर दिखाना होगा। इसका मतलब है कि बैंक को अब इन बॉन्ड्स की मूल राशि और समय-समय पर दिए जाने वाले कूपन भुगतान को मान्यता देनी पड़ सकती है।
जस्टिस Dipankar Datta और जस्टिस Augustine George Masih की बेंच ने यह सुनवाई की। इस बेंच ने जनवरी 2023 में Bombay High Court द्वारा दिए गए फैसले को बरकरार रखा है।
बॉन्ड राइट ऑफ के फैसले पर कानूनी टिप्पणी
अदालत ने स्पष्ट किया कि Yes Bank के प्रशासक के पास बॉन्ड्स को राइट डाउन करने का कोई विशिष्ट अधिकार नहीं था। 13 मार्च 2020 से प्रभावी अंतिम Reconstruction Scheme में ऐसा कोई प्रावधान शामिल नहीं किया गया था।
कोर्ट ने पाया कि हालांकि ड्राफ्ट वर्जन में इस शक्ति का जिक्र था, लेकिन अंतिम अधिसूचित दस्तावेज में इसकी अनुपस्थिति बैंक के बचाव के लिए घातक साबित हुई।
LiveLaw, Business Standard और Indian Express की रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट ने यह भी कहा कि जब बैंक का Common Equity Tier 1 अनुपात गिरकर 0.6 प्रतिशत के निचले स्तर पर पहुंच गया था, तब Reserve Bank of India केवल एक मूकदर्शक बना रहा।
अदालत ने यह भी गौर किया कि Yes Bank ने इन उच्च जोखिम वाले इंस्ट्रूमेंट्स को रिटेल निवेशकों को सक्रिय रूप से बेचा था। यह मास्टर सर्कुलर के उन प्रतिबंधों का उल्लंघन था, जिनके तहत ऐसी बिक्री केवल संस्थागत खरीदारों तक सीमित होनी चाहिए थी।
शेयर बाजार और बैंक की वित्तीय स्थिति पर असर
16 अक्टूबर 2026 को इस फैसले की जानकारी मिलने के बाद Yes Bank के शेयरों में करीब 14.5 प्रतिशत की गिरावट आई। NSE पर शेयर 18.12 रुपये और BSE पर 18.15 रुपये पर बंद हुआ।
इस एक सत्र के दौरान बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 9,605 करोड़ रुपये घट गया। यह पिछले छह वर्षों में इस शेयर के लिए सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावटों में से एक है।
बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि इस फैसले का उसके Common Equity Tier 1 अनुपात पर करीब 250 बेसिस पॉइंट्स का प्रो फॉर्मा प्रभाव पड़ेगा। यह गणना 30 जून 2026 तक के आंकड़ों पर आधारित है।
हालांकि, इस बदलाव के बावजूद प्रो फॉर्मा आधार पर Tier 1 अनुपात 14 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 2026 के लिए Yes Bank ने 3,476 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। इस हिसाब से 8,415 करोड़ रुपये की बॉन्ड राशि बैंक की कुल वार्षिक कमाई का 2.4 गुना है।
संकट का इतिहास और वर्तमान शेयरहोल्डिंग
साल 2019 और 2020 के दौरान संस्थापक स्तर पर खराब गवर्नेंस और कमजोर अंडरराइटिंग की वजह से बैंक में गंभीर संकट पैदा हुआ था। इसके बाद Reserve Bank of India ने 5 मार्च 2020 को मोरेटोरियम लगाया था।
इसके बाद एक रिकंस्ट्रक्शन प्लान लाया गया, जिसमें State Bank of India के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी डाली थी। 14 मार्च 2020 को प्रशासक ने 2016 और 2017 के ट्रेंच में जारी AT1 बॉन्ड्स को पूरी तरह राइट डाउन करने का आदेश दिया था।
इस फैसले के बाद रिटेल और संस्थागत बॉन्डधारकों ने तुरंत कानूनी चुनौती दी थी। वर्तमान शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, मध्य 2026 तक Sumitomo Mitsui Banking Corporation 24.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है।
State Bank of India की हिस्सेदारी लगभग 10.8 प्रतिशत है। बॉन्डधारकों में रिटेल निवेशकों की बड़ी संख्या है और रिपोर्ट्स के मुताबिक 97 प्रतिशत से अधिक व्यक्तिगत खाते शुरुआती राइट ऑफ से प्रभावित हुए थे।
भविष्य की रणनीति और रिकवरी प्रक्रिया
बैंक के खुलासे के अनुसार, भविष्य के अकाउंटिंग ट्रीटमेंट की जांच अभी बैंक प्रबंधन द्वारा की जा रही है। बाजार अब आगामी तिमाही नतीजों पर नजर रखेगा ताकि पूंजी जुटाने की योजनाओं या शेयरधारकों के लिए संभावित डाइल्यूशन की स्थिति स्पष्ट हो सके।
बॉन्डधारक अब अपने ट्रस्टी के माध्यम से रिकवरी की कोशिश करेंगे। साथ ही, बैंकिंग क्षेत्र अब इस मिसाल के दीर्घकालिक प्रभावों के लिए तैयार हो रहा है कि कैपिटल इंस्ट्रूमेंट्स के प्रवर्तन के नियम क्या होंगे।









