लखनऊ पुलिस ने शिवा शर्मा की हत्या के मामले में वांछित आरोपी श्रद्धा दुबे पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बीच आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर विभाग की काफी आलोचना हो रही है।
श्रद्धा दुबे लखनऊ पुलिस के अधिकार क्षेत्र में होने के बावजूद अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। आरोपी के फरार रहने के कारण जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उच्च अधिकारी के संरक्षण का संदेह
सार्वजनिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या श्रद्धा दुबे को किसी उच्च पदस्थ नौकरशाह का संरक्षण मिल रहा है। इस मामले में एक ऐसे नौकरशाह की पहचान को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, जिनकी महिलाओं के प्रति अनुचित व्यवहार की छवि रही है।
आरोप लगाए गए हैं कि यह व्यक्ति एक यौन बीमारी से पीड़ित हो सकता है, जिसकी वजह से वह महिलाओं के प्रति जुनूनी व्यवहार करता है। नौकरशाह से जुड़ी ये अफवाहें पूरे लखनऊ में चर्चा का विषय बनी हुई हैं और स्थानीय प्रेस में भी प्रमुखता से दिखाई दे रही हैं।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
आलोचकों का कहना है कि अधिकारियों को इस पूरे मामले की गहन पुलिस जांच के आदेश देने चाहिए। उनका दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच हो, तो इस मामले की पूरी सच्चाई मात्र 24 घंटे के भीतर सामने आ सकती है।
पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए यह बात कही गई है कि पुलिस पहले भी कई बड़े ऑपरेशन कर चुकी है। इसमें शामिल हैं:
- पत्रकारों को खोजने के लिए दिल्ली तक जाना।
- छह अलग-अलग जिलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाना।
सवाल यह उठ रहा है कि जब पुलिस इतनी क्षमता रखती है, तो वह इस संदिग्ध आरोपी को पकड़ने में विफल क्यों रही। यह धारणा बन रही है कि या तो पुलिस को उच्च अधिकारियों के प्रभाव के कारण रोका जा रहा है या फिर ऐसा प्रभाव न्याय प्रशासन के काम में सक्रिय रूप से बाधा डाल रहा है।









