भारत के सुप्रीम कोर्ट ने वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को मंजूरी देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्या कांत की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने इस फॉर्म में किसी भी तरह के संशोधन को अपनी अनुमति नहीं दी है।
इस सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहाना भी मौजूद थे। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट अब यह जांच करेगा कि इन बदलावों को करने का अधिकार किसने दिया था और इसके लिए जरूरी रिकॉर्ड मांगे गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI), केंद्र सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में किए गए अनधिकृत बदलावों के आरोपों पर जवाब मांगा है।
चुनाव आयोग के दावे और विवाद की वजह
यह पूरा विवाद चुनाव आयोग द्वारा 26 सितंबर को जारी की गई एक प्रेस रिलीज से शुरू हुआ। इस रिलीज में आयोग ने दावा किया था कि संशोधित फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल गई है।
आयोग ने उस समय कहा था कि नॉन-स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अवधि के लिए फॉर्म का इस्तेमाल रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के अनुसार किया जाएगा। हालांकि, चुनाव आयोग अब भी अपने स्टैंड पर कायम है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के 27 मई, 2026 के एक फैसले का हवाला दे रहा है।
चुनाव आयोग का तर्क है कि उसने मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया है। आयोग के मुताबिक, उसने केवल SIR अवधि के लिए एक एनेक्सचर (Annexure-D) जोड़ा था।
विशेषज्ञों की आलोचना और पोर्टल से बदलाव
लोकसभा के पूर्व महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ PDT आचार्य ने सार्वजनिक रूप से चुनाव आयोग की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को गलत जानकारी उपलब्ध कराई है।
इस कानूनी चुनौती के बाद चुनाव आयोग ने अपने ECINET पोर्टल से एक अतिरिक्त घोषणा पत्र हटा लिया है। यह घोषणा पत्र पूर्वजों की वोटर लिस्ट हिस्ट्री से संबंधित था और इसे उन राज्यों से हटाया गया है जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
इस बदलाव का नतीजा यह है कि अब इन क्षेत्रों के नए आवेदकों को अपने माता-पिता या दादा-दादी की वोटर डिटेल्स देने की जरूरत नहीं होगी।
कोर्ट का फैसला और आंतरिक विरोध
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत निलंबित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग के अंदर भी इस मुद्दे पर मतभेद थे। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पहले ही फॉर्म-6 में किए गए इन बदलावों पर अपनी आपत्ति जताई थी।

























