INDIA गठबंधन के सांसदों ने 6 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगना है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में अनियमितताएं बरती गई हैं। इसी वजह से गठबंधन के सांसद इस बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन कर रहे हैं।
देश की तीसरी सबसे बड़ी और दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने इस मार्च में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। समाजवादी पार्टी के सभी 37 सांसद इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे।
इस पूरे दल का नेतृत्व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव करेंगे। यह कदम विपक्षी गठबंधन द्वारा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग के तहत उठाया गया है।
लोकतंत्र बचाओ अभियान और विपक्ष की मांगें
यह लामबंदी INDIA गठबंधन के एक व्यापक अभियान का हिस्सा है। गठबंधन द्वारा 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 के बीच जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च आयोजित किए जा रहे हैं।
विपक्ष की मांगें अब और तेज हो गई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग दोहराई है।
इसके अलावा विपक्ष ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाया जाए।
- वर्तमान में चल रहे मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया को रद्द किया जाए।
- वोटिंग के लिए फिर से पेपर बैलेट (कागजी मतपत्र) प्रणाली पर लौटा जाए।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और चुनाव आयोग की सफाई
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग वाली याचिकाओं पर 5 अक्टूबर 2026 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में निलंबन का कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वह केवल समाचार रिपोर्टों के आधार पर कोई फैसला नहीं सुना सकती। इस फैसले के बाद अब मामला कानूनी प्रक्रिया के अधीन है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि संशोधन प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना है।
आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया के जरिए सूची से डुप्लीकेट, मृत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाया जा रहा है। चुनाव आयोग का दावा है कि यह सब चुनावी अखंडता को बनाए रखने के लिए किया जा रहा है।
विपक्षी नेताओं के आरोप और संवैधानिक mandate
तेजस्वी यादव, सचिन पायलट और शिव सेना (UBT) के नेताओं सहित कई विपक्षी दिग्गजों ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया चुनाव की स्वतंत्रता को कमजोर करती है।
विपक्षी नेताओं का मानना है कि इस तरह के बदलावों से निष्पक्ष चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। इसी असंतोष के कारण 6 अक्टूबर का मार्च आयोजित किया जा रहा है।
इन तमाम विवादों के बीच, चुनाव आयोग ने कहा है कि वह अपने संवैधानिक जनादेश के तहत काम कर रहा है। आयोग का संचालन संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार हो रहा है।

























