दिल्ली पुलिस ने 4 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा था।
इस घटना के दौरान प्रदर्शनकारी नेहा बोरा को ले जा रहे पुलिस वाहन पर चढ़ गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की इस कार्रवाई को हिरासत में लेना नहीं बल्कि ‘अपहरण’ करार दिया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिस वाहन में नेहा बोरा को ले जाया गया, उसमें कोई भी महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। उनका दावा है कि यह हिरासत में लेने के मानक प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।
नेहा बोरा ने लगाया पुलिसकर्मी पर हमले का आरोप
नेहा बोरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत के दौरान उनके साथ ‘बर्बर’ व्यवहार किया गया। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
नेहा बोरा ने विशेष रूप से प्रीति नाम की एक महिला कांस्टेबल पर शारीरिक हमले का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, इस पुलिसकर्मी ने उन्हें कोहनी मारी, उन्हें खरोंचा और उनके अंतःवस्त्र (undergarments) फाड़ दिए।
बोरा ने यह सवाल भी उठाया कि महिलाओं और पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार क्या मुख्य चुनाव आयुक्त को जनता की जांच से बचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
पिछले प्रदर्शन और अन्य गिरफ्तारियां
यह घटना 2 और 3 अक्टूबर 2026 को हुई पिछली गिरफ्तारियों के बाद सामने आई है। इन प्रदर्शनों में नेहा बोरा के साथ आम आदमी पार्टी के नेता आतिशी और संजय सिंह, और कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी हिरासत में लिए गए थे।
ये सभी लोग वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये विरोध प्रदर्शन बिना अनुमति के किए गए थे।
पुलिस के अनुसार, जिस इलाके में यह प्रदर्शन हो रहा था, वहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू थी।
जांच और नए सुरक्षा आदेश
दिल्ली पुलिस ने पुष्टि की है कि 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों द्वारा दर्ज कराई गई यौन उत्पीड़न की शिकायतों को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है।
इसी बीच, दिल्ली के उपराज्यपाल ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कमिश्नर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 के तहत शक्तियां प्रदान की हैं।
4 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद, नेहा बोरा ने महिलाओं और पत्रकारों के खिलाफ पुलिस के कथित दुर्व्यवहार के विरोध में एक ‘सिटिजन मार्च’ का आह्वान किया। यह मार्च दोपहर 3:00 बजे इंडिया गेट से जंतर मंतर तक आयोजित किया जाना था।
सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार और व्यापक नागरिक अशांति को लेकर जांच अभी भी जारी है।

























