All India Students Association (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने उनका अपहरण किया है। उन्होंने कहा कि राजधानी में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें पुलिस की गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया था।
नेहा बोरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखी और दावा किया कि पुलिस की यह कार्रवाई औपचारिक हिरासत नहीं बल्कि अपहरण था। उन्होंने दिल्ली पुलिस से मांग की है कि वह तुरंत उनकी लोकेशन का खुलासा करे।
यह पूरा मामला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगा रहे हैं।
जंतर मंतर पर प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
रिकॉर्ड के अनुसार, नेहा बोरा को 2 अक्टूबर और 3 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई बार हिरासत में लिया था। इसके बाद 4 अक्टूबर 2026 तक नेहा बोरा ने अपनी सक्रियता फिर से शुरू कर दी थी।
उन्होंने इंडिया गेट से जंतर मंतर तक एक ‘सिटिजन्स मार्च’ निकालने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के प्रति पुलिस के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए।
कानूनी मामले और यौन उत्पीड़न के आरोप
इन विरोध प्रदर्शनों को लेकर कानूनी तनाव काफी बढ़ गया है। 2 अक्टूबर को पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए। इनमें धारा 223(a), 221, 132 और 3(5) शामिल हैं।
पुलिस ने इन धाराओं का हवाला देते हुए कानूनी आदेशों की अवज्ञा, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और आपराधिक बल के इस्तेमाल का मामला दर्ज किया है।
इसी बीच, 2 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने पुष्टि की है कि इन शिकायतों को आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।
विदेशी फंडिंग के आरोप और पुलिस का पक्ष
इस अशांति के बीच CJP नेता अभिजीत दीपके भी सामने आए हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस प्रदर्शनकारियों और विदेशी फंडिंग के बीच फर्जी संबंध बनाने की कोशिश कर रही है।
अभिजीत दीपके ने एक हिरासत में लिए गए व्यक्ति के साथ शारीरिक शोषण के आरोपों के बाद एक ACP के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि उनकी कार्रवाई पूरी तरह जायज है। पुलिस के मुताबिक नई दिल्ली जिले और जंतर मंतर इलाके में निषेधाज्ञा (prohibitory orders) लागू थे।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत पुलिस कमिश्नर की शक्तियों को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। यह विस्तार 18 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा, जिसे पुलिस ने एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।

























