दिल्ली में 4 अक्टूबर 2026 को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नेतृत्व में नागरिकों ने एक बड़ा मार्च निकाला। यह प्रदर्शन इंडिया गेट से शुरू होकर जंतर मंतर की ओर बढ़ा, जहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग की।
यह पूरा विरोध प्रदर्शन स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ किया गया है। इस मार्च में सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वोटर लिस्ट के रिवीजन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गई हैं। उन्होंने विशेष रूप से वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया है।
पुलिस कार्रवाई और हिरासत में लिए गए लोग
राजधानी में पिछले कुछ दिनों से तनाव काफी बढ़ गया है। 3 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने लगभग 150 से 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। ये लोग पटेल चौक से जंतर मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे।
हिरासत में लिए गए लोगों में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष Neha Bora, कार्यकर्ता Yogendra Yadav और वरिष्ठ वकील Prashant Bhushan शामिल थे। इसके अलावा, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने भी इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया।
पुलिस ने 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के संबंध में कई केस दर्ज किए हैं। इन केसों में सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने और उनके साथ मारपीट करने के आरोप लगाए गए हैं।
विभिन्न संगठनों और दिग्गजों का समर्थन
यह विरोध आंदोलन 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के दिन शुरू हुआ था। इसमें कई बड़े नामों और संगठनों ने हिस्सा लिया है, जिनमें शामिल हैं:
- वरिष्ठ वकील Kapil Sibal, Nitya Ramakrishnan और Pallav Sisodia
- आम आदमी पार्टी (AAP)
- विभिन्न वामपंथी छात्र संगठन
अधिकारियों ने 2 अक्टूबर को लगभग 1,100 लोगों को हिरासत में लिया था। दिल्ली पुलिस ने इन प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी थी क्योंकि नई दिल्ली जिले में Section 163 (BNSS) लागू था, जिसके तहत मार्च और सार्वजनिक सभाओं पर रोक है।
सुरक्षा इंतजाम और गंभीर आरोप
व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई दिल्ली इलाके और जंतर मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने मेट्रो स्टेशनों के कई प्रवेश और निकास द्वारों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था।
Neha Bora ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया है।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi ने प्रदर्शनकारियों का बचाव किया है। उनका कहना है कि ये लोग लोकतंत्र और वोट देने के अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं।
वोटर लिस्ट विवाद को लेकर इस तरह के विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं हैं। मुंबई सहित देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के प्रदर्शनों की खबरें आई हैं।

























