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महादेवा धाम में खुदाई से निकला चांदी के सिक्कों का खजाना, सन 1875 अंकित 75 सिक्के बरामद

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Naradsamvad - Narad news Agency
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नारद संवाद न्यूज एजेंसी से आर के शुक्ल

चांदी के सिक्के देखने के लिए महादेवा चौकी पर मौजूद लोग

रामनगर बाराबंकी।प्रसिद्ध लोधेश्वर महादेवा धाम में कॉरिडोर निर्माण कार्य के दौरान गुरुवार को खुदाई के दौरान प्राचीन चांदी के सिक्कों का खजाना मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।जानकारी के मुताबिक मजदूर जब मंदिर परिसर के समीप स्थित गुप्ता बंधुओं की मिठाई की दुकानों के पास ध्वस्तीकरण कार्य कर रहे थे, तभी मिट्टी की खुदाई में तीन घड़े मिले। घड़ों के भीतर से बड़ी मात्रा में चांदी के सिक्के निकल आए।सिक्कों की चमक देखते ही मजदूरों में छीना-झपटी शुरू हो गई।इस दौरान वहां मौजूद स्थानीय निवासी सतीश मिश्र ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही महादेव चौकी इंचार्ज अभिनंदन पांडे मौके पर पहुंचे और सिक्कों को कब्जे में ले लिया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों एसडीएम रामनगर गुंजिता अग्रवाल और नायब तहसीलदार विजय प्रकाश तिवारी की मौजूदगी में सिक्कों की गिनती कराई गई। गिनती के बाद कुल 75 चांदी के सिक्के बरामद हुए।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इन सिक्कों पर सन 1875 अंकित है,जो इन्हें ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है।अधिकारियों ने बरामद सिक्कों को सुरक्षित पैक कर जिला अधिकारी बाराबंकी के पास भेजने की तैयारी की है। फिलहाल सिक्कों को प्रशासनिक सुरक्षा में रखा गया है और उनकी जांच की प्रक्रिया जारी है।घटना की खबर फैलते ही आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। लोग सिक्कों को देखने की जिद करने लगे, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने उन्हें पास जाने की अनुमति नहीं दी।सूत्रों का कहना है कि खुदाई में घड़ों की संख्या अधिक थी और मजदूरों के हाथ भी कुछ सिक्के लगे हैं जिन्हें उन्होंने छिपा लिया।स्थानीय बुद्धिजीवियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि महादेवा धाम ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का स्थल है। यहां बार-बार इस प्रकार की घटनाएं यह साबित करती हैं कि मंदिर और उसके आस-पास की जमीन में अमूल्य धरोहरें छिपी हो सकती हैं।उन्होंने मांग की है कि कॉरिडोर निर्माण व ध्वस्तीकरण कार्य कैमरों की निगरानी में कराए जाएं,ताकि यदि कोई रत्न, आभूषण या खजाना मिले तो वह सुरक्षित रूप से सरकारी की खजाने में पहुंच सके साथ ही स्थलों की पुरातात्विक टीम व आधुनिक मशीनों से जांच कराने की भी जरूरत है।फिलहाल प्रशासन इस बरामदगी को ऐतिहासिक खोज के रूप में देख रहा है और आगे की कार्रवाई जिलाधिकारी के निर्देशानुसार की जाएगी।

 

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