भारत अपने अंतरिक्ष मिशनों की संख्या और क्षमता को बढ़ाने के लिए साल 2029 तक कुल चार ऑपरेशनल लॉन्च पैड स्थापित करेगा। ISRO के चेयरमैन V. Narayanan ने 24 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में आयोजित एक ग्रेजुएशन समारोह के दौरान इस विस्तार योजना की पुष्टि की है।
वर्तमान में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में दो सक्रिय लॉन्च पैड मौजूद हैं। इन मौजूदा सुविधाओं के जरिए PSLV, SSLV, GSLV और LVM3 जैसे रॉकेट वाहनों को लॉन्च किया जाता है।
इसी केंद्र पर अब एक तीसरे लॉन्च पैड का निर्माण कार्य चल रहा है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 3,984.86 करोड़ रुपये की लागत को मंजूरी दी है। अधिकारियों का अनुमान है कि यह तीसरा पैड मार्च 2029 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा।
तमिलनाडु में नए स्पेसपोर्ट का निर्माण
चौथे लॉन्च पैड की स्थापना तमिलनाडु के तूतीकुड़ी जिले में बनाए जा रहे नए स्पेसपोर्ट के मुख्य हिस्से के रूप में की जाएगी। इस परिसर को कुलसेकरपट्टिनम कॉम्प्लेक्स के नाम से जाना जाता है और यह लगभग 2,000 एकड़ जमीन में फैला हुआ है।
ISRO के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस विशेष सुविधा के लिए 985.96 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 2025 के मध्य तक निर्माण कार्य में काफी प्रगति हुई है और यह साइट लगभग पूरी होने के करीब है।
इस नए स्पेसपोर्ट में खास तौर पर इंटीग्रेशन बिल्डिंग और रेल-ट्रैक सिस्टम बनाए जाएंगे। इसके अलावा, यहाँ Small Satellite Launch Vehicle के लिए एडवांस टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड सिस्टम भी लगाए जाएंगे।
निजी क्षेत्र की भागीदारी और रोजगार
इस विस्तार रणनीति में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी। चेयरमैन V. Narayanan ने स्पष्ट किया कि ISRO अपने मुख्य ऑपरेशंस का निजीकरण नहीं करेगा, बल्कि स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
कुलसेकरपट्टिनम कॉम्प्लेक्स में रुचि रखने वाले निजी ऑपरेटरों के लिए IN-SPACe वर्तमान में आउटरीच का काम संभाल रहा है। इस पहल का उद्देश्य छोटे सैटेलाइट लॉन्च की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करना और हजारों हाई-टेक नौकरियां पैदा करना है।
गगनयान मिशन और भविष्य की योजनाएं
बुनियादी ढांचे के साथ-साथ ISRO गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन को अंतिम रूप दे रहा है। चेयरमैन ने बताया कि अगले दो महीनों के भीतर पहली बिना चालक दल वाली (uncrewed) टेस्ट फ्लाइट होगी।
मुख्य चालक दल वाले मिशन से पहले दो और बिना चालक दल वाले परीक्षण किए जाएंगे। ग्राउंड टेस्टिंग में काफी काम हो चुका है और अब तक लगभग 8,000 प्रयोग पूरे किए जा चुके हैं। इन मिशनों के लिए चार निर्धारित अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
भविष्य में वैज्ञानिक सहयोग को प्राथमिकता देते हुए ISRO जापान के साथ मिलकर चंद्रयान-5 मिशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। इस प्रोजेक्ट में एक 350 किलोग्राम का रोवर शामिल होगा, जो चंद्रमा की सतह पर 100 दिनों तक काम कर सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि चार पैड होने से तकनीकी देरी और ऑपरेशनल रिस्क कम होंगे। इससे भारत घरेलू जमीन से लॉन्च की दर बढ़ाकर SpaceX जैसे वैश्विक खिलाड़ियों का प्रभावी मुकाबला कर सकेगा।
ISRO का तत्काल ध्यान दिसंबर 2026 के अंत तक गगनयान फ्लाइट टेस्ट पूरा करने पर है। साथ ही, तमिलनाडु साइट पर निर्माण कार्य और IN-SPACe द्वारा निजी ऑपरेटरों का चयन अगले एक साल में आगे बढ़ेगा। ये सभी प्रयास देश को 2029 के इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्य तक पहुँचाएंगे।









