प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने 24 अक्टूबर को मुंबई एयरपोर्ट पर वकील रशेश उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया। वह दिल्ली जाने वाली फ्लाइट पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी उन्हें पकड़ लिया गया। यह गिरफ्तारी डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड नेटवर्क की एक बड़ी जांच का हिस्सा है, जिसमें लगभग 28,000 करोड़ रुपये के बैंकिंग लेनदेन का मामला सामने आया है।
इस पूरे ऑपरेशन को पणजी जोनल यूनिट के अधिकारियों ने अंजाम दिया। इस कार्रवाई में उन्हें कस्टम्स और सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के कर्मियों से मदद मिली। गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की एक विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने 29 अक्टूबर तक रशेश उपाध्याय को ईडी की कस्टडी में रखने की अनुमति दे दी है।
रशेश उपाध्याय, जिन्हें रशेश शाह के नाम से भी जाना जाता है, इस ongoing जांच के दौरान हिरासत में लिए गए सातवें व्यक्ति हैं। इस पूरे मामले की शुरुआत 9 जून 2025 को गोवा पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) से हुई थी।
गोवा निवासी के साथ हुई करोड़ों की धोखाधड़ी
यह कानूनी कार्रवाई गोवा के एक निवासी की शिकायत के बाद शुरू हुई थी। इस व्यक्ति ने 21 मई और 2 जून 2025 के बीच कुल 2,60,33,634 रुपये गंवाए थे। जालसाजों ने इस पीड़ित को वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी में रखा था।
पीड़ित को डरा-धमकाकर मजबूर किया गया कि वह अपना पैसा उन खातों में ट्रांसफर करे, जिन्हें जालसाजों ने ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट’ बताया था। इस तरीके से पीड़ित से करोड़ों रुपये ठगे गए थे।
वित्तीय नेटवर्क का बड़ा खुलासा
जांचकर्ताओं ने पाया कि ठगी गई रकम को तेजी से 400 से अधिक म्यूल अकाउंट्स (mule accounts) के जरिए घुमाया गया। इसके बाद इस पैसे को या तो कैश के रूप में निकाला गया या लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर्स के जरिए विदेशी मुद्रा में बदल दिया गया।
एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों में कुल 28,000 करोड़ रुपये के लेनदेन दर्ज किए गए। इन खातों में करीब 2,900 करोड़ रुपये कैश जमा किए गए थे। इनमें से लगभग 584.70 करोड़ रुपये को बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीनों के जरिए 61,448 ट्रांजैक्शन में प्रोसेस किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि ये खाते 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 160 से अधिक FIR और 300 से ज्यादा पीड़ित शिकायतों से जुड़े हैं। पीड़ितों द्वारा रिपोर्ट किए गए कुल नुकसान 400 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि एजेंसी के एक बयान में यह राशि 417.49 करोड़ रुपये बताई गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि कम से कम 101 मामलों में एक ही पीड़ित से पैसा एक ही ग्रुप के कई अलग-अलग खातों में गया। यह इस बात का संकेत है कि अवैध पूंजी का एक केंद्रीकृत पूल बनाया गया था।
रशेश उपाध्याय की भूमिका और आरोप
एजेंसी का आरोप है कि रशेश उपाध्याय इस नेटवर्क में एक मुख्य नोड के रूप में काम कर रहे थे। उनकी मुख्य जिम्मेदारी उन बैंक खातों को अनफ्रीज कराना था, जिन्हें धोखाधड़ी की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने ब्लॉक कर दिया था।
अधिकारियों का दावा है कि वह अंगड़ियों (Angadiyas) के रूप में जाने जाने वाले निजी कैश ट्रांसफर बिचौलियों के जरिए रिश्वत का इंतजाम कर यह काम करते थे। अभियोजकों का यह भी कहना है कि उन्होंने अदालत में आरोपियों का औपचारिक रूप से प्रतिनिधित्व नहीं किया और न ही उनकी ओर से कोई वकालतनामा दाखिल किया।
ये सभी आरोप अभी न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं क्योंकि अभी तक कोई ट्रायल पूरा नहीं हुआ है।
डिजिटल अरेस्ट घोटाले का तरीका और अन्य गिरफ्तारियां
डिजिटल अरेस्ट स्कीम में जालसाज वीडियो कॉल पर खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारियों या CBI और प्रवर्तन निदेशालय जैसी एजेंसियों के अधिकारी बताकर लोगों को ठगते हैं। वे पीड़ितों पर मनी लॉन्ड्रिंग या पार्सल फ्रॉड जैसे गंभीर अपराधों के आरोप लगाकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं।
जब पीड़ित पूरी तरह डर जाता है, तो अपराधी वेरिफिकेशन के नाम पर उनसे सुपरविजन अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। गोवा का मामला इसी तरीके का एक सटीक उदाहरण है।
इस मामले में पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं:
- फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को 23 अगस्त 2025 के आसपास हिरासत में लिया गया था।
- मुकेश कुमार पुखराज जैन, जिन्हें मुकेश भाई भी कहा जाता है, अक्टूबर के मध्य में गिरफ्तार होने वाले छठे व्यक्ति बने।
एजेंसी ने पहले की गई तलाशी और गिरफ्तार लोगों से मिली जानकारी के आधार पर इस बड़े नेटवर्क के खिलाफ अपना केस तैयार किया है। जांचकर्ता अब भी पैसे के बहाव और उन लोगों का पता लगा रहे हैं जिन्होंने इन लेनदेनों को संभव बनाया।
अब भविष्य के प्रयासों में उन विशिष्ट अधिकारियों की पहचान करने पर ध्यान दिया जाएगा, जिन्होंने अंगड़िया नेटवर्क के माध्यम से रिश्वत ली थी। इसके अलावा, एजेंसी इन अवैध कमाईयों से जुड़ी संपत्तियों को कुर्क (attachment) करने की योजना बना रही है। जैसे-जैसे यह मामला आगे बढ़ेगा, देश भर में डिजिटल अरेस्ट के तरीकों के खिलाफ सार्वजनिक एडवाइजरी जारी किए जाने की उम्मीद है।









