बाराबंकी शहर के बीचों-बीच धनोखर चौराहे पर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर इन दिनों गंभीर उपेक्षा और बदहाली का सामना कर रहा है। यह मंदिर लाखों लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है, लेकिन रखरखाव के अभाव में इसकी संरचना धीरे-धीरे खराब होती जा रही है।
मंदिर में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रार्थना करने और दर्शन करने के लिए आते हैं। इसके बावजूद, मंदिर की देखरेख न होने के कारण पूरी इमारत जर्जर स्थिति में पहुंच गई है।
मंदिर के शिखर और ढांचे की खराब स्थिति
मंदिर के शिखर पर घनी घास और बड़े-बड़े खरपतवार उग आए हैं। ऐसा लगता है कि पिछले कई महीनों से इस हिस्से की सफाई नहीं की गई है। पेड़ों की जड़ें अब चिनाई के अंदर तक घुस गई हैं, जिससे पूरी इमारत में सीलन आ रही है और दीवारों में दरारें पड़ गई हैं।
इतना ही नहीं, शिखर पर बनी वास्तुकला की विशेषताएं टूट चुकी हैं। मंदिर में स्थापित कई मूर्तियां भी बंदरों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दी गई हैं, जिससे मंदिर की सुंदरता और पवित्रता प्रभावित हो रही है।
किराये की आय और प्रबंधन पर सवाल
मंदिर समिति की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया गया है कि मंदिर समिति कई दुकानों का प्रबंधन करती है, जिनसे हर महीने किराये के रूप में अच्छी आय प्राप्त होती है। आरोप है कि इस धन का उपयोग मंदिर के रखरखाव और मरम्मत के लिए नहीं किया जा रहा है।
यह चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते शिखर की सफाई नहीं की गई और उगी हुई घास को नहीं हटाया गया, तो मंदिर की मजबूती और भी कम हो जाएगी। मंदिर समिति से इन जरूरी मरम्मत कार्यों को तुरंत पूरा करने की अपील की गई है।
नगर पालिका अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय लोगों का सुझाव है कि यदि मंदिर समिति इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाती है, तो नगर पालिका अध्यक्ष को इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेनी चाहिए। उन्हें मंदिर की इस बदहाल स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए।
नगर पालिका अध्यक्ष के माध्यम से मरम्मत कार्य शुरू करवाया जाना चाहिए, ताकि इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल की पुरानी रौनक और भव्यता को फिर से बहाल किया जा सके।

























