हरदोई जिले में लखनऊ मंडल स्नातक विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गुरुवार को Government Inter College (GIC) मैदान से चुनाव सामग्री के साथ मतदान दलों को रवाना किया गया।
इस चुनाव में कुल 47,838 स्नातक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान की प्रक्रिया शुक्रवार को सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर शाम 4:00 बजे तक चलेगी।
पूरे जिले में कुल 47 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों के भीतर कुल 67 पोलिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं जहां मतदाता वोट डालेंगे।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक इंतजाम
चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। इसके लिए जिले को 20 अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया है।
निगरानी के लिए पांच जोनल मजिस्ट्रेट और पांच जोनल पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। सुरक्षा के लिहाज से हर पोलिंग साइट पर पुलिस और सशस्त्र बलों के जवानों का पहरा रहेगा।
जिला मजिस्ट्रेट Rahul Pandey और पुलिस अधीक्षक Ashok Kumar Meena ने मतदान दलों की रवानगी वाली जगह का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां मौजूद अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी जारी किए।
पार्टी के भीतर तनाव और विवाद
चुनाव से पहले BJP उम्मीदवार Avnish Kumar Singh को लेकर राजनीतिक तनाव देखा जा रहा है। यह विवाद मल्लवान शहर इकाई के महासचिव और मनोनीत पार्षद Virendra Mishra ‘Baba’ के बयानों के बाद शुरू हुआ है।
Mishra ने आरोप लगाया है कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने ‘तथाकथित मठ प्रमुखों’ की आलोचना की, जो जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करते हुए हजारों वोटों का दावा कर रहे हैं।
अब यह देखना बाकी है कि पार्टी के भीतर की यह नाराजगी मतदान प्रतिशत और संगठनात्मक गतिविधियों पर क्या असर डालती है।
चुनाव के मुख्य मुद्दे और चुनौतियां
इस चुनाव में कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। मतदाताओं के बीच पिछले छह वर्षों में विकास निधि के इस्तेमाल और प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की स्थिति को लेकर सवाल हैं।
युवाओं के लिए उपलब्ध कराए गए लाभ और सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और पढ़ाई की सुविधाओं जैसे मुद्दों पर जोर है। इसके अलावा बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे भी अहम हैं।
विभिन्न नेताओं ने उम्मीदवार के समर्थन में अपील की है, लेकिन इन समर्थन पत्रों के प्रभाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि कुछ वकील खुद पंजीकृत मतदाता नहीं हैं।

























