उत्तर प्रदेश के किसान इस समय खराब मौसम और प्रशासन की लापरवाही की दोहरी मार झेल रहे हैं। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
खरीफ सीजन की धान खरीद शुरू हुए 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकारी आंकड़े बताते हैं कि व्यवस्था पूरी तरह विफल रही है। पूरे राज्य में धान की खरीद बहुत कम हुई है।
पीलीभीत, संभल और सीतापुर जैसे बड़े धान उत्पादक जिलों को मिलाकर कुल मिलाकर केवल 600 क्विंटल धान की ही खरीद दर्ज की गई है।
खरीद केंद्रों की जियो-टैगिंग में बड़ी देरी
खरीद केंद्रों के लिए की जाने वाली जियो-टैगिंग की प्रक्रिया बहुत धीमी चल रही है। अब तक केवल 440 RFC, 510 PCF, 386 UCU और 196 UPSS केंद्रों की जियो-टैगिंग पूरी हो सकी है।
इसके अलावा, केवल 43 मंडी समिति और 27 FCI केंद्रों को ही जियो-टैग किया गया है। इस धीमी प्रक्रिया की वजह से किसान अपनी फसल बेचने के लिए केंद्रों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।
शाहजहाँपुर में पंजीकरण और सत्यापन की स्थिति
शाहजहाँपुर जिले के पंजीकरण आंकड़े पूरी व्यवस्था की नाकामी को साफ दिखाते हैं। यहाँ अब तक केवल 1,203 पंजीकरण ही पूरे हो पाए हैं।
हैरानी की बात यह है कि इन पंजीकृत किसानों में से केवल 245 का ही सत्यापन किया जा सका है। प्रशासन की इस सुस्ती के कारण किसान अपनी उपज लेकर भटकने को मजबूर हैं।
बिचौलियों का फायदा और अधिकारियों की जवाबदेही
प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण किसान अपनी फसल को बहुत कम दामों पर मिलर्स और बिचौलियों को बेचने पर मजबूर हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह देरी जानबूझकर की जा रही है ताकि किसान हताश हो जाएं और बिचौलिए फायदा उठा सकें।
किसानों को DAP खाद की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि कागजों पर ‘बंपर’ खरीद के आंकड़े दिखाने से पहले बिचौलियों को मौका दिया जा रहा है।
इस पूरी स्थिति के लिए अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में विशेष रूप से इन जिलों के जिलाधिकारियों का नाम सामने आया है:
- शाहजहाँपुर
- लखीमपुर खीरी
- बरेली
- फर्रुखाबाद
किसानों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि प्रशासन उनकी तकलीफों के प्रति पूरी तरह उदासीन है। अधिकारी केवल खोखले आश्वासन दे रहे हैं और किसान खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं।

























