बाराबंकी के लोनी कटरा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मकानपुर गांव के निवासी गोपीचंद्र कश्यप ने प्रशासन से मदद मांगी है। उनका आरोप है कि स्थानीय दबंगों ने उनकी झोपड़ी को जबरन गिरा दिया है।
गोपीचंद्र कश्यप शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। उनका कहना है कि दबंग लोग उन्हें उनकी अपनी जमीन पर पक्का घर बनाने से रोक रहे हैं और इसमें बाधा डाल रहे हैं।
कश्यप का दावा है कि झोपड़ी नष्ट होने के बाद से वह बेघर हो गए हैं। इस समस्या के समाधान और न्याय के लिए वह लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
सरकारी दफ्तरों में न्याय की गुहार
अपनी परेशानी दूर करने के लिए गोपीचंद्र कश्यप ने कई बार स्थानीय पुलिस स्टेशन और तहसील कार्यालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक (SP) के कार्यालय में भी संपर्क किया।
इन तमाम कोशिशों के बावजूद उनका कहना है कि उनकी समस्याओं का अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है। वह अपने संपत्ति अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए अभी भी सरकारी कागजी प्रक्रियाओं और दफ्तरों के बीच भटकने को मजबूर हैं।
क्षेत्र में जमीन विवाद और प्रशासनिक चुनौतियां
लोनी कटरा क्षेत्र में जमीन से जुड़ी शिकायतों का एक पैटर्न देखा गया है। यहां के निवासी अक्सर स्थानीय अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण के मामलों को सुलझाने में होने वाली देरी की शिकायत करते रहे हैं।
जिला मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में जिला प्रशासन नियमित रूप से ‘समाधान दिवस’ सत्र आयोजित करता है। इन सत्रों का उद्देश्य जनता के जमीन विवादों और शिकायतों का निपटारा करना होता है।
इतने इंतजामों के बाद भी कश्यप जैसे नागरिकों को समय पर राहत मिलने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके मामले में हस्तक्षेप की कमी स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है।
जमीन विवादों को लेकर पुलिस की प्रतिक्रिया के प्रति चिंताएं बनी हुई हैं। बाराबंकी जिले में हाल के दिनों में दर्ज की गई शिकायतों में यह एक बार-बार सामने आने वाला मुद्दा रहा है।

























