Cockroach Janta Party (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता Ashutosh Ranka और मुख्य प्रवक्ता Saurav Das को बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत के आदेश के बाद इन दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल में बंद किया गया है।
इन दोनों नेताओं को उनके साथी सदस्य Ajinkya Shinde के साथ मंगलवार, 13 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस ने उन्हें जंतर मंतर इलाके में बिना अनुमति के प्रवेश करने के आरोप में पकड़ा था।
यह पूरी कार्रवाई 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई किए जाने के बाद हुई। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब वहां प्रदर्शन करना प्रतिबंधित है।
कानूनी शर्तों का उल्लंघन और पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि Ashutosh Ranka और Saurav Das ने पहले से मौजूद एक कानूनी बॉन्ड की शर्तों को तोड़ा है। इस बॉन्ड के तहत उन्हें एक साल तक किसी भी तरह की विरोध गतिविधियों में शामिल होने से प्रतिबंधित किया गया था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन आरोपियों ने न केवल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि सार्वजनिक शांति भी भंग की। पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि इन नेताओं के खिलाफ दो अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।
बुधवार सुबह जब उन्हें एक Executive Magistrate के सामने पेश किया गया, तो पुलिस ने इन गिरफ्तारियों को निवारक उपाय बताया। पुलिस ने उन पर निम्नलिखित आरोप लगाए हैं:
- अनाधिकृत रूप से परिसर में घुसना (Trespassing)
- सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालना
- निषेधाज्ञा आदेशों का उल्लंघन करना
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और पार्टी का पक्ष
अभिजीत Dipke के नेतृत्व वाली Cockroach Janta Party वर्तमान में मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध कर रही है। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रही है।
पार्टी सदस्यों का तर्क है कि वे वहां शांतिपूर्वक राष्ट्रीय ध्वज फहरा रहे थे और देशभक्ति के नारे लगा रहे थे। हालांकि, पुलिस का कहना है कि नए प्रतिबंधों के बावजूद इस समूह ने सुरक्षा बैरिकेड्स को तोड़कर अंदर प्रवेश किया था।
CJP की लीगल अफेयर्स हेड Ratna Singh ने बताया कि पार्टी फिलहाल Ajinkya Shinde की जमानत की औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी है। वहीं, पार्टी संस्थापक Abhijeet Dipke ने इस हिरासत को लोकतांत्रिक असहमति को दबाने की कोशिश बताते हुए इसकी सार्वजनिक रूप से निंदा की है।









