National Payments Corporation of India (NPCI) ने कुछ खास Unified Payments Interface (UPI) ट्रांजैक्शन पर लगने वाले Merchant Discount Rate (MDR) चार्जेस को दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया है। UPI और Services Steering Committee ने यह फैसला लिया है, जिससे पहले इन चार्जेस को 15 अक्टूबर से लागू किया जाना था।
मुंबई में 13 अक्टूबर 2026 को जारी NPCI के आधिकारिक दस्तावेजों में इस देरी की पुष्टि की गई है। यह कदम त्योहारी सीजन के दौरान खरीदारी करने वाले यूजर्स और व्यापारियों को राहत देने के लिए उठाया गया है। अब ये चार्जेस दिवाली के बाद किसी तारीख से लागू होंगे, जिसकी सूचना अलग से दी जाएगी।
दिवाली 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। NPCI ने इस घोषणा को अपने आधिकारिक X अकाउंट @NPCI_NPCI के जरिए साझा किया है, जिससे यह साफ हो गया है कि फिलहाल भुगतान की मौजूदा व्यवस्था वैसी ही बनी रहेगी।
UPI ट्रांजैक्शन और डिजिटल भुगतान का विस्तार
भारत में डिजिटल पेमेंट के लिए UPI अब सबसे मुख्य माध्यम बन चुका है। NPCI द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अकेले सितंबर 2026 में इस प्लेटफॉर्म के जरिए 24.07 बिलियन ट्रांजैक्शन किए गए। इन सभी ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू 29.37 लाख करोड़ रुपये रही।
नेटवर्क पर अब रोजाना 802 मिलियन से ज्यादा ट्रांजैक्शन होने लगे हैं। UPI इकोसिस्टम में पिछले एक दशक में बहुत तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। वित्त वर्ष 2016-17 में सालाना ट्रांजैक्शन की संख्या 1.78 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गई।
Medianama और Entrackr के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में ट्रांजैक्शन की संख्या में लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह, ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू में भी सालाना करीब 18 प्रतिशत का उछाल आया है।
मर्चेंट फीस और चार्जेस के नए नियम
NPCI ने 15 सितंबर को घोषणा की थी कि संशोधित MDR फ्रेमवर्क के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा person to merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाया जाएगा। इस फीस की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।
कुछ खास कैटेगरी के लिए अलग नियम बनाए गए थे। टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल, यूटिलिटीज और रेलवे जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये की फ्लैट फीस लगाई जानी थी। हालांकि, छोटे व्यापारियों और आम यूजर्स को बचाने के लिए कई छूट भी दी गई हैं:
- Person to person (P2P) ट्रांसफर पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
- 2,000 रुपये या उससे कम के सभी ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे।
- ऐसे छोटे मर्चेंट जो UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक कमाते हैं, उन्हें यह फीस नहीं देनी होगी।
CNBC-TV18 और The Economic Times की रिपोर्ट्स के मुताबिक, NPCI ने मर्चेंट को यह सख्त निर्देश दिया है कि वे यह खर्च ग्राहकों से नहीं वसूल सकते। साथ ही, पेमेंट ऐप्स को भी यूजर्स पर प्लेटफॉर्म चार्ज लगाने से मना किया गया है।
बाजार की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजना
13 अक्टूबर को इस खबर के आने के बाद फाइनेंशियल मार्केट में हलचल दिखी। The Hindu BusinessLine और Mint की रिपोर्ट्स के अनुसार, MDR चार्जेस टलने की खबर से फिनटेक शेयरों में रिकवरी हुई और वे अपने इंट्राडे लो स्तर से ऊपर आए।
इस फैसले से बिजनेस को कई हफ्तों का समय मिल गया है। अब वे साल के सबसे महंगे शॉपिंग सीजन में बिना किसी नए ट्रांजैक्शन कॉस्ट के हाई वैल्यू पेमेंट स्वीकार कर सकेंगे। इस बीच बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करेंगे ताकि भविष्य में इसे लागू किया जा सके।
NPCI का कहना है कि MDR का उद्देश्य सिस्टम का विस्तार करना, धोखाधड़ी रोकने की क्षमता को बढ़ाना और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए फंड जुटाना है। हालांकि अभी इस फ्रेमवर्क को रोका गया है, लेकिन इस पॉलिसी को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है। दिवाली के बाद UPI और Services Steering Committee एक नई नोटिफिकेशन जारी करेगी, जिसमें इन चार्जेस की नई तारीख बताई जाएगी।









